छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 398, कुल 978 में से
संदर्भ में पढ़ेंअष्टम खण्ड
मद्गुद्वारा ब्रह्मके चतुर्थ पादका उपदेश
मद्गुष्टे पादं वक्तेति स ह श्वोभूते गा अभिप्रस्थापयाञ्चकार ता यत्राभि सायं बभूवुस्तत्राग्निमुपसमाधाय गा उपरुध्य समिधमाधाय पश्चादग्नेः प्राङुपोपविवेश ॥ १ ॥
'मद्गु तुझे [ चौथा ] पाद बतलावेगा' ऐसा [ कहकर हंस चला गया ]। दूसरे दिन उसने गौओंको गुरुकुलकी ओर हाँक दिया। वे सायंकालमें जहाँ एकत्रित हुईं वहीं अग्नि प्रज्वलित कर गायोंको रोक समिधाधान कर अग्निके पीछे पूर्वाभिमुख होकर बैठ गया ॥ १ ॥
| हंसोऽपि मद्गुष्टे पादं वक्ते-<br><br>त्युपरराम । मद्गुरुदकचरः पक्षी<br><br>स चाप्सम्बन्धात्प्राणः । स ह<br><br>श्वोभूत इत्यादि पूर्ववत् ॥ १ ॥ | हंस भी 'मद्गु तुझे [ चौथा ] पाद बतलावेगा' ऐसा कहकर चला गया। 'मद्गु' जलचर पक्षीको कहते हैं; जलसे सम्बन्ध होनेके कारण वह प्राण ही है। 'स ह श्वोभूते' इत्यादि वाक्यका तात्पर्य पूर्ववत् है ॥ १ ॥ |
—: ० :—
तं मद्गुरुपनिपत्याभ्युवाद सत्यकाम ३ इति भगव इति ह प्रतिशुश्राव ॥ २ ॥
मद्गुने उसके पास उतरकर कहा—'सत्यकाम !' तब उसने उत्तर दिया 'भगवन् !' ॥ २ ॥