भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

पृष्ठ 482, कुल 978 में से

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पृष्ठ 482

४७८ छान्दोग्योपनिषद् [ अध्याय ५


राजन्मानुषं वित्तंयामेव कुमारस्यान्ते वाचमभाषथास्ता-
मेव मे ब्रूहीति स ह कृच्छ्री बभूव ॥ ६ ॥

तब वह गौतम राजाके स्थानपर आया। राजाने अपने यहाँ आये हुए उसकी पूजा की। [ दूसरे दिन प्रातःकाल होते ही राजाके सभामें पहुँचनेपर वह गौतम उसके पास गया। उसने उससे कहा—'हे भगवान् गौतम ! आप मनुष्यसम्बन्धी धनका वर माँग लीजिये।' उसने कहा—'राजन् ! ये मनुष्यसम्बन्धी धन आपहीके पास रहें; आपने मेरे पुत्रके प्रति जो बात [ प्रश्नरूपसे ] कही थी वही मुझे बतलाइये।' तब वह संकटमें पड़ गया ॥ ६ ॥

स ह गौतमो गोत्रतः, राज्ञो जैवलेरर्धं स्थानमेयायागतवान् । तस्मै ह गौतमाय प्राप्तायार्हाम-र्हणां चकार कृतवान् । स च गौतमः कृतातिथ्य उषित्वा परेद्युः प्रातःकाले सभागे सभां गते राज्ञ्युदेयाय । भजनं भागः पूजा सेवा सह भागेन वर्तमानो वा सभागः पूज्यमानोऽन्यैः स्वयं गौतम उदेयाय राजान-मुद्गतवान् ।<br><br>तं होवाच गौतमं राजा—मानुषंस्य भगवन्गौतम मनुष्य-सम्बन्धिनो वित्तस्य ग्रामादेर्वरं वरणीयं कामं वृणीथाःप्रार्थयेथाः।वह गौतम-गोत्रोत्पन्न मुनि राजा जैवलिके स्थानपर आया । अपने यहाँ आये हुए उस गौतमकी उसने अर्हा-पूजा की । इस प्रकार आतिथ्यसत्कारसे सत्कृत वह गौतम उस दिन निवास कर दूसरे दिन सबेरे ही राजाके सभागत होने--सभामें पहुँचनेपर उसके समीप गया । अथवा [ 'सभागः' पाठ मानकर ऐसा अर्थ हो सकता है-] भाग-भजन अर्थात् पूजा-सेवाको कहते हैं जो भागसे युक्त अर्थात् दूसरेसे पूजित था वह गौतम स्वयं राजाके पास गया ।<br><br>उस गौतमसे राजाने कहा--'हे भगवन् ! आप मनुष्यसम्बन्धी ग्रामादि धनका वरण करने योग्य वर इच्छानुसार माँग लीजिये।'