छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ
पृष्ठ 492, कुल 978 में से
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| ४८८ | छान्दोग्योपनिषद् | [अध्याय ५ |
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| विस्फुलिङ्गाः, ह्रादनयो गर्जित- | है; मेघोंकी गर्जनाके शब्दोंको |
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| शब्दा मेघानां विप्रकीर्णत्वसा- | 'ह्रादनि' कहते हैं; विप्रकीर्णत्व (इधर-उधर फैले रहने) में समानता |
| मान्यात् ॥ १ ॥ | होनेके कारण वे विस्फुलिङ्ग हैं ॥ १ ॥ |
तस्मिन्नेतस्मिन्नग्नौ देवाः सोमं राजानं जुह्वति तस्या आहुतेर्वर्ष सम्भवति ॥ २ ॥
उस अग्निमें देवगण राजा सोमका हवन करते हैं; उस आहुतिसे वर्षा होती है ॥ २ ॥
| तस्मिन्नेतस्मिन्नग्नौ देवाः पूर्ववत्सोमं राजानं जुह्वति। तस्या आहुतेर्वर्षं संभवति । श्रद्धाख्या आपः सोमाकारपरिणता द्वितीये पर्याये पर्जन्याग्निं प्राप्य वृष्टि-त्वेन परिणमन्ते ॥ २ ॥ | उस इस अग्निमें देवगण पूर्ववत् राजा सोमका हवन करते हैं । उस आहुतिसे वर्षा होती है । श्रद्धासंज्ञक आप् इस द्वितीय पर्यायमें सोमके आकारमें परिणत हो पर्जन्याग्निको प्राप्त होकर वृष्टिरूपमें परिणत हो जाते हैं ॥ २ ॥ |
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इतिच्छान्दोग्योपनिषदि पञ्चमाध्याये पञ्चमखण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥ ५ ॥