छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ
पृष्ठ 496, कुल 978 में से
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| ४९२ | छान्दोग्योपनिषद् | [ अध्याय ५ |
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उस इस अग्निमें देवगण अन्नका होम करते हैं। उस आहुतिसे वीर्य उत्पन्न होता है ॥ २ ॥
| समानमन्यत् । अन्नं जुह्वति <br><br> व्रीह्यादिसंस्कृतम् । तस्या <br><br> आहुते रेतः संभवति ॥ २ ॥ | शेष अर्थ पूर्ववत् है। देवगण इसमें व्रीहि आदिसे सम्यक् प्रकारसे तैयार किये हुए अन्नका हवन करते हैं। उस आहुतिसे वीर्य उत्पन्न होता है ॥ २ ॥ |
<div align="center">इतिच्छान्दोग्योपनिषदि पञ्चमाध्याये
सप्तमखण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥ ७ ॥