भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

पृष्ठ 562, कुल 978 में से

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पृष्ठ 562
५५८छान्दोग्योपनिषद्[ अध्याय ५

| अथ होवाचोद्दालकमित्यादि समानम् । पृथिवीमेव भगवो राजन्निति होवाच । एष वै प्रतिष्ठा पादौ वैश्वानरस्य । पादौ ते व्यम्लास्येतां विम्लानावेभविष्यतां श्लथीभूतौ यन्मां नागमिष्य इति ॥ १-२ ॥ | 'फिर उद्दालकसे कहा' इत्यादि अर्थ पूर्ववत् है। [उद्दालकने कहा-] 'हे पूज्य राजन् ! मैं पृथिवीकी ही उपासना करता हूँ' [ राजा बोला-] 'यह निश्चय ही वैश्वानर आत्माकी प्रतिष्ठा यानी उसके चरण हैं। यदि तुम मेरे पास न आते तो तुम्हारे चरण विशेषरूपसे म्लान अर्थात् शिथिल हो जाते' ॥१-२॥ |

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इतिच्छान्दोग्योपनिषदि पञ्चमाध्याये सप्तदशखण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥ १७ ॥

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