भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

पृष्ठ 595, कुल 978 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 595

खण्ड २ ] शाङ्करभाष्याथ ५९१


संस्कृतहिन्दी अनुवाद
एव सदुत्पत्तिः सेत्स्यति। न त्वसद्वादिनां दृष्टान्तोऽस्त्यसतः सदुत्पत्तेः। मृत्पिण्डाद्घटोत्पत्तिर्दृश्यते सद्वादिनां तद्भावे भावात्तदभावे चाभावात्।ही सिद्ध होगी। असत्से सत्की उत्पत्ति होनेमें असद्वादियोंके पास कोई दृष्टान्त भी नहीं है। सद्वादियोंके मतमें मृत्तिकाके पिण्डसे घटकी उत्पत्ति होती देखी गयी है; क्योंकि उसकी सत्ताके रहते हुए घटकी भी सत्ता है और उसका अभाव होनेपर घटका भी अभाव हो जाता है।
यद्यभावादेव घट उत्पद्येत घटार्थिना मृत्पिण्डो नोपादीयेत। अभावशब्दबुद्ध्यनुवृत्तिश्च घटादौ प्रसज्येत न त्वेतदस्त्यतो नासतः सदुत्पत्तिः।यदि अभावसे ही घटकी उत्पत्ति होती तो घट बनानेकी इच्छावालेको मृत्तिकाका पिण्ड लेनेकी आवश्यकता न होती तथा घटादिमें 'अभाव' शब्द और अभाव-बुद्धिकी अनुवृत्तिका भी प्रसंग उपस्थित होता। किंतु ऐसा नहीं। इसलिये असत्से सत्की उत्पत्ति नहीं हो सकती।
यदप्याहुर्मृद्बुद्धिर्घटबुद्धेर्निमित्तमिति मृद्बुद्धिर्घटबुद्धेः कारणमुच्यते, न तु परमार्थत एव मृद्घटो वास्तीति; तदपि मृद्बुद्धिर्विद्यमाना विद्यमानाया एव घटबुद्धेः कारणमिति नासतः सदुत्पत्तिः।इसके सिवा वे लोग जो ऐसा कहते हैं कि 'मृत्तिकाबुद्धि घटबुद्धिका निमित्त है; अतः मृद्बुद्धि ही घटबुद्धिका कारण कही जाती है, वस्तुतः मृत्तिका अथवा घट कुछ भी नहीं है' इसके अनुसार भी विद्यमान मृद्बुद्धि ही विद्यमान घटबुद्धिका कारण है; अतः असत्से सत्की उत्पत्ति सिद्ध नहीं होती।