भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

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पृष्ठ 596

५९२ छान्दोग्योपनिषद् [ अध्याय ६


| मृद्घटबुद्ध्योर्निमित्तनैमित्तिकतयानन्तर्यमात्रं न तु कार्यकारणत्वमिति चेत् ? न; बुद्धीनां नैरन्तर्ये गम्यमाने वैनाशिकानां बहिर्दृष्टान्ताभावात् । | यदि कहो कि मृद्बुद्धि तथा घटबुद्धिका निमित्त और नैमित्तिकरूपसे आनन्तर्यमात्र* है; कार्य कारण भाव नहीं है तो ऐसा कहना भी ठीक नहीं; क्योंकि इन बुद्धियोंकी निरन्तरताका ज्ञान करानेमें वैनाशिकोंके पास कोई बाह्य दृष्टान्त नहीं है ।‡ | | अतः कुतस्तु खलु सोम्यैवं स्यादिति होवाच कथं केन प्रकारेणासतः सज्जायेतेति । असतः सदुत्पत्तौ न कश्चिदपि दृष्टान्तप्रकारोऽस्तीत्यभिप्रायः । एवमसद्वादिपक्षमन्मथ्योपसंहरति सदेव सोम्येदमग्र आसीदिति स्वपक्षसिद्धिम् । | 'अतः हे सोम्य ! ऐसा कैसे हो सकता है ?' ऐसा आरुणिने कहा । अर्थात् असत्से सत्की उत्पत्ति कैसे—किस प्रकार हो सकती है । तात्पर्य यह है कि असत्से सत्की उत्पत्ति होनेमें कोई भी दृष्टान्तका प्रकार नहीं है । इस तरह असद्वादीके पक्षका उन्मन्थन (निरसन) कर आरुणि 'हे सोम्य ! आरम्भमें यह सत् ही था' इस प्रकार अपने पक्षकी सिद्धिका उपसंहार करता है । | | ननु सद्वादिनोऽपि सतः सदुत्पद्यत इति नैव दृष्टान्तोऽस्ति । घटाद्धटान्तरोत्पत्त्यदर्शनात् । | शङ्का—किंतु सद्वादीके मतानुसार सत्से सत्की उत्पत्ति होती है इसमें भी तो कोई दृष्टान्त नहीं है, क्योंकि एक घटसे दूसरे घटकी उत्पत्ति होती नहीं देखी जाती । |


* अर्थात् पहले मृद्बुद्धि होती है उसके बाद घटबुद्धि—यही सूचित करता है ।
‡ बौद्धमतावलम्बी बाह्य पदार्थोंकी सत्ता नहीं मानते; अतः उनके सिद्धान्तानुसार मृद्बुद्धि, घटबुद्धि आदि भी असत् ही है । इसलिये इनका नैरन्तर्य अथवा निमित्त-नैमित्तिकत्व बतलाना भी असंगत ही है ।