भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

पृष्ठ 713, कुल 978 में से

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पृष्ठ 713

खण्ड १६] शाङ्करभाष्यार्थ ७०९


| च। तद्वत्तस्यापि देहादिष्वात्मबुद्धित्वान्न स्यात्सदात्मविज्ञानम्। तस्माद्विकारानृताधिकृतजीवात्मविज्ञाननिवर्तकमेवेदं वाक्यं तत्त्वमसीति सिद्धमिति ॥ ३ ॥ | सम्भव हो सकता है और यही बात देखी भी जाती है। इसी प्रकार उसे देहादिमें आत्मबुद्धि होनेके कारण सदात्मबुद्धि नहीं होती। अतः यह सिद्ध हुआ कि ‘तत्त्वमसि’ यह वाक्य विकाररूप मिथ्या देहादिमें अधिकृत जीवात्मभावकी निवृत्ति करनेवाला ही है ॥ ३ ॥ |


इतिच्छान्दोग्योपनिषदि षष्ठाध्याये
षोडशखण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥१६॥

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इति श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य
श्रीशंकरभगवतः कृतौ छान्दोग्योपनिषद्वि-
वरणे षष्ठोऽध्यायः सम्पूर्णः ॥ ६ ॥

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