भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

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पृष्ठ 796

७९२ | छान्दोग्योपनिषद् | [ अध्याय ७


| स्वतोऽन्यं महिमानमाश्रितो भूमा चैत्रवदिति ब्रवीम्यत्र हेतुत्वेनान्यो ह्यन्यस्मिन्प्रतिष्ठित इति व्यवहितेन सम्बन्धः। किं त्वेवं ब्रवीमीति होवाच स एवेत्यादि ॥ २ ॥ | आश्रित और उनमें प्रतिष्ठित होता है उसी प्रकार चैत्रके समान ही भूमा भी अपनेसे भिन्न महिमामें आश्रित है--ऐसा मैं नहीं कहता। यहाँ 'क्योंकि अन्य पदार्थ अन्यमें प्रतिष्ठित होता है' इस व्यवधानयुक्त वाक्यसे इसका हेतुरूपसे सम्बन्ध है। किंतु मैं तो यह कहता हूँ, ऐसा कहकर सनत्कुमारजीने 'स एव अधस्तात्' इत्यादि कहा ॥ २ ॥ |


इतिच्छान्दोग्योपनिषदि सप्तमाध्याये चतुर्विंशखण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥ २४ ॥