भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

पृष्ठ 845, कुल 978 में से

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पृष्ठ 845

खण्ड ४ ] शाङ्करभाष्यार्थ ८४१


पीत्यर्थः । तेषां सर्वेषु लोकेषु कामचारो भवतीत्युक्तार्थम् । तस्मात्परमेतत् साधनं ब्रह्मचर्यं ब्रह्मविदामित्यभिप्रायः ॥ ३ ॥होती—ऐसा इसका तात्पर्य है । उनकी सम्पूर्ण लोकोंमें स्वेच्छागति हो जाती है—इस प्रकार इसका अर्थ पहले कहा जा चुका है । अतः अभिप्राय यह है कि यह ब्रह्मचर्य ब्रह्मोपासकोंका परम साधन है ॥ ३ ॥
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इतिच्छान्दोग्योपनिषद्यष्टमाध्याये चतुर्थ-
खण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥ ४ ॥

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