छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ
पृष्ठ 959, कुल 978 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 959
( ५५५ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|
| उपकोसलो ह वै | ४ | १० | १ | ४०० |
| उपमन्त्रयते स हिङ्कारः | २ | १३ | १ | १९१ |
| ऋग्वेदं भगवोऽध्येमि | ७ | १ | २ | ७१३ |
| ऋतुषु पञ्चविधम् | २ | ५ | १ | १६३ |
| एकविँशत्यादित्यम् | २ | १० | ५ | १८५ |
| एतँ संयद्वाम इत्याचक्षते | ४ | १५ | २ | ४२२ |
| एतद्ध स्म वै तद्विद्वाँसः | ६ | ४ | ५ | ६१९ |
| एतद्ध स्म वै तद्विद्वानाह | ३ | १६ | ७ | ३२८ |
| एतमु एवाहमभ्यगासिषम् | १ | ५ | २ | ८४ |
| ,, ,, | १ | ५ | ४ | ८६ |
| एतमृग्वेद मभ्यतपँस्तस्याभि० | ३ | १ | ३ | २४४ |
| एतेषां मे देहीति | १ | १० | ३ | १२४ |
| एवं यथाश्मानमाखणमृत्वा | १ | २ | ८ | ५६ |
| एवँ सोम्य ते षोडशानाम् | ६ | ७ | ६ | ६३७ |
| एवमेव खलु सोम्य | ६ | ६ | २ | ६२९ |
| ,, ,, | ६ | ११ | ३ | ६७४ |
| एवमेव खलु सोम्येमाः | ६ | १० | २ | ६६९ |
| एवमेव प्रतिहर्तारमुवाच | १ | १० | ११ | १३० |
| एवमैवैष मघवन्निति | ८ | ९ | ३ | ८९२ |
| ,, ,, | ८ | ११ | ३ | ९०३ |
| एवमैवैष सम्प्रसादः | ८ | १२ | ३ | ९२४ |
| एवमेवोद्गातारमुवाच | १ | १० | १० | १३० |
| एवमेषां लोकानामासाम् | ४ | १७ | ८ | ४३८ |
| एष उ एव भामनीरेष हि | ४ | १५ | ४ | ४२३ |
| एष उ एव वामनीरेष हि | ४ | १५ | ३ | ४२२ |
| एष तु वा अतिवदति | ७ | १६ | १ | ७७४ |
| एष म आत्मान्तर्हृदये | ३ | १४ | ३ | ३११ |
| एष वै यजमानस्य | २ | २४ | १५ | २४० |
| एष ह वा उदक्प्रवणः | ४ | १७ | ९ | ४३९ |
| एष ह वै यज्ञो योऽयम् | ४ | १६ | १ | ४२८ |
| एषां भूतानां पृथिवी रसः | १ | १ | २ | ३३ |
| ओ ३ मदा ३ मो ३ पिबा० | १ | १२ | ५ | १४२ |