छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ
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( ९५६ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|
| ओमित्येतदक्षरमुद्गीथमुपासीत | १ | ४ | १ | १७७ |
| ,, ,, | १ | १ | १ | ३१ |
| औपमन्यव कं त्वम् | ५ | १२ | १ | ५४५ |
| कं ते काममागायानीत्येषः | १ | ७ | ९ | १५४ |
| कतमा कतमर्क्कतमत् | १ | १ | ४ | ३५ |
| कल्पन्ते हास्मा ऋतवः | २ | ५ | २ | १६४ |
| कल्पन्ते हास्मै | २ | २ | ३ | १५८ |
| का साम्नो गतिरिति | १ | ८ | ४ | १०९ |
| कुतस्तु खलु | ६ | २ | २ | ५८८ |
| क्व तर्हि यजमानस्य | २ | २४ | २ | २३४ |
| गायत्री वा इदँ सर्वम् | ३ | १२ | १ | २७९ |
| गोअश्वमिह महिमेत्याचक्षते | ७ | २४ | २ | ७९१ |
| चक्षुरेव ब्रह्मणश्चतुर्थः | ३ | १८ | ५ | ३४२ |
| चक्षुरेवर्गात्मा | १ | ७ | २ | ९८ |
| चक्षुर्होवाचकाम | ५ | १ | ९ | ४४९ |
| चित्तं वाव सङ्कल्पाद्भूयः | ७ | ५ | १ | ७३४ |
| जानश्रुतिर्ह पौत्रायणः | ४ | १ | १ | ३५२ |
| तं चेदेतस्मिन्वयसि | ३ | १६ | २ | ३२५ |
| ,, ,, | ३ | १६ | ४ | ३२६ |
| ,, ,, | ३ | १६ | ६ | ३२७ |
| तं चेद्ब्रूयुरस्मिंश्चेदिदम् | ८ | १ | ४ | ८११ |
| त चेद्ब्रूयुर्यदिदमस्मिन् | ८ | १ | २ | ८०७ |
| तं जायोवाच ततः | ४ | १० | २ | ४०१ |
| तं जायोवाच हन्त | १ | १० | ७ | १२७ |
| तं मद्गुरुपनिपत्याभ्युवाद | ४ | ८ | २ | ३९४ |
| तँ हँ स उपनिपत्याभ्युवाद | ४ | ७ | २ | ३९२ |
| तँ ह चिरं वसेत्याशा० | ५ | ३ | ७ | ४७९ |
| तँ ह प्रवाहणः | १ | ८ | ८ | ११५ |
| तँ ह शिलकः | १ | ८ | ६ | ११२ |
| तँ हाङ्गिरा उद्गीथम् | १ | २ | १० | ५९ |
| तँ हाभ्युवाद रैक्वेदम | ४ | २ | ४ | ३६६ |
| तँ हैतमतिधन्वा | १ | ९ | ३ | ११९ |