छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ
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( ९५८ )
| मन्त्र प्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|
| तद्य इह रमणीयचरणाः | ५ | १० | ७ | ५२९ |
| तद्य एवैतं ब्रह्मलोकम् | ८ | ४ | ३ | ८४० |
| तद्य एवैतावरं च | ८ | ५ | ४ | ८४७ |
| तद्यत्प्रथमममृतम् | ३ | ६ | १ | २५७ |
| तद्यत्रैतत्सुप्तः | ८ | ६ | ३ | ८५७ |
| ,, ,, | ८ | ११ | १ | ९०१ |
| तद्यथा महापथ आततः | ८ | ६ | २ | ८५६ |
| तद्यथा लवणेन | ४ | १७ | ७ | ४३८ |
| तद्यथेषीकातूलमग्नौ | ५ | २४ | ३ | ५७० |
| तद्यथेह कर्मजितो लोकः | ८ | १ | ६ | ८१९ |
| तद्यदृक्तो रिष्येद् भूः | ४ | १७ | ४ | ४३५ |
| तद्यन्दक प्रथममागच्छेत् | ५ | १९ | १ | ५६३ |
| तद्यद्रजतं सेयं पृथिवी | ३ | १९ | २ | ३४७ |
| तथा एतदनुज्ञाक्षरं यद्धि | १ | २ | ८ | ४१ |
| तद्यध्यक्षरतदादित्यम् | ३ | १ | ४ | २४७ |
| ,, ,, | ३ | २ | ३ | २५० |
| ,, ,, | ३ | ३ | ३ | २५१ |
| ,, ,, | ३ | ४ | ३ | २५२ |
| ,, ,, | ३ | ५ | ३ | २५४ |
| तमग्निरभ्युवाद सत्यकाम | ४ | ६ | २ | ३८९ |
| तमु ह परः प्रत्युवाच | ४ | १ | ३ | ३५६ |
| ` तमु ह परः प्रत्युवाचाह | ४ | २ | ३ | ३६४ |
| तयोरन्यतरां मनसा | ४ | १६ | २ | ४३० |
| तस्मा आदित्याश्च | २ | २४ | १६ | २४१ |
| तस्मा उ ह ददुस्ते | ४ | ३ | ८ | ३७६ |
| तस्मादप्यद्येहाददान० | ८ | ८ | ५ | ८८५ |
| तस्मादाहुः सोष्यति | ३ | १७ | ५ | ३३२ |
| तस्मादु हैवंविद्यद्यपि | ५ | २४ | ४ | ५७१ |
| तस्माद्वा एतं सेतुम् | ८ | ४ | २ | ८३९ |
| तस्मिन्निमानि सर्वाणि | २ | ९ | २ | १७४ |
| तस्मिन्नेतस्मिन्नग्नौ | ५ | ४ | २ | ४८४ |
| ,, ,, | ५ | ५ | २ | ४८८ |