छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ
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( ९५९ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृ० |
|---|---|---|---|---|
| तस्मिन्नेतस्मिन्नग्नौ | ५ | ६ | २ | ४९० |
| ,, ,, | ५ | ७ | २ | ४९१ |
| ,, ,, | ५ | ८ | २ | ४९४ |
| तस्मिन्यावत्सम्पातम् | ५ | १० | ५ | ५१४ |
| तस्मै श्वा श्वेतः | १ | १२ | २ | १४० |
| तस्य क्व मूलँ स्याद् | ६ | ८ | ४ | ६५१ |
| ,, ,, | ६ | ८ | ६ | ६५६ |
| तस्य प्राची दिग्जुहूर्नाम | ३ | १५ | २ | ३१८ |
| तस्य यथा कप्यासम् | १ | ६ | ७ | ९४ |
| तस्य यथाभिनहनम् | ६ | १४ | २ | ६८६ |
| तस्य ये प्राञ्चो रश्मयः | ३ | १ | २ | २४४ |
| तस्यर्क् च साम च गेष्णौ | १ | ६ | ८ | ९६ |
| तस्य ह वा एतस्य | ३ | १३ | १ | २८९ |
| तस्य ह वा एतस्यात्मनः | ५ | १८ | २ | ५६१ |
| तस्य ह वा एतस्यैवम् | ७ | २६ | १ | ७९८ |
| तस्या ह मुखमुपोद्गृह्णन् | ४ | २ | ५ | ३६६ |
| तस्यैषा दृष्टिर्यत्रैतत् | ३ | १३ | ८ | ३०० |
| त्रयी विद्या हिङ्कारस्त्रयः | २ | २१ | १ | २०४ |
| त्रयो धर्मस्कन्धा यज्ञः | २ | २३ | १ | २१४ |
| त्रयो होद्गीथे | १ | ८ | १ | १०६ |
| ता आप ऐक्षन्त | ६ | २ | ४ | ५९९ |
| तानि वा एतानि यजूं ष्येतम् | ३ | २ | २ | २४९ |
| तानि वा एतानि सामानि | ३ | ३ | २ | २५१ |
| तानि ह वा एतानि | ७ | ४ | २ | ७२९ |
| ,, ,, | ७ | ५ | २ | ७३५ |
| ,, ,, | ८ | ३ | ५ | ८३४ |
| तानु तत्र मृत्युरंया | १ | ४ | ३ | ७९ |
| तान्यभ्यतपत्तेभ्यः | २ | २३ | ३ | २३१ |
| तान्होवाच प्रातर्वः | ५ | ११ | ७ | ५४३ |
| तान्होवाचाश्वपतिर्वे | ५ | ११ | ४ | ५४० |
| तान्होवाचोहैव | १ | १२ | ३ | १४० |
| तान्होवाचैते वै खलु | ५ | १८ | १ | ५५९ |