छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ
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( ९६१ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृ० |
|---|---|---|---|---|
| देवा वै मृत्योर्बिभ्यतः | १ | ४ | २ | ७८ |
| देवासुरा ह वै यत्र | १ | २ | १ | ४७ |
| द्यौरेवर्गादित्यः | १ | ६ | ३ | ९१ |
| द्यौरेवोदन्तरिक्ष गीः | १ | ३ | ७ | ७२ |
| ध्यानं वाव चित्ताद्भूयः | ७ | ६ | १ | ७३८ |
| नक्षत्राण्येवर्क्चन्द्रमाः | १ | ६ | ४ | ९१ |
| न वधेनास्य हन्यते | ८ | १० | २ | ८९५ |
| ” ” | ८ | १० | ४ | ८९६ |
| न वै तत्र न निम्लोच | ३ | ११ | २ | २७३ |
| न वै नूनं भगवन्तस्ते | ६ | १ | ७ | ५८० |
| न वै वाचो न चक्षूंषि | ५ | १ | १५ | ४५३ |
| न स्विदेतेऽप्युच्छिष्टा इति | १ | १० | ४ | १२४ |
| न ह वा अस्मा उदेति | ३ | ११ | ३ | २७४ |
| न हाप्सु प्रैत्यप्सुमान् | २ | ४ | २ | १६२ |
| नान्यस्मै कस्मैचन | ३ | ११ | ६ | २७६ |
| नाम वा ऋग्वेदो यजुर्वेदः | ७ | १ | ४ | ७१८ |
| नाहमत्र भोग्यं पश्यामीति | ८ | ९ | २ | ८८९ |
| निधनमिति त्र्यक्षरम् | २ | १० | ४ | १८४ |
| नैवैतेन सुरभि न | १ | २ | ९ | ५८ |
| न्यग्रोधफलमत आहरेतीदम् | ६ | १२ | १ | ६७६ |
| पञ्च मा राजन्यबन्धुः | ५ | ३ | ५ | ४७६ |
| परोवरीयो हास्य भवति | २ | ७ | २ | १६८ |
| पर्जन्यो वाव गौतमाग्निः | ५ | ५ | १ | ४८७ |
| पशुषु पञ्चविधम् | २ | ६ | १ | १६५ |
| पुरा तृतीयसवनस्योपा० | २ | २४ | ११ | २३९ |
| पुरा प्रातरनुवाकस्योपा० | २ | २४ | ३ | २३५ |
| पुरा माध्यन्दिनस्य | २ | २४ | ७ | २३८ |
| पुरुषँ सोम्योत | ६ | १६ | १ | ६९८ |
| पुरुषँ सोम्योतोपतापिनम् | ६ | १५ | १ | ६९४ |
| पुरुषो वाव गौतमाग्निः | ५ | ७ | १ | ४९१ |
| पुरुषो वाव यज्ञस्तस्य | ३ | १६ | १ | ३२३ |
| पृथिवी वाव गौतमाग्निः | ५ | ६ | १ | ४८९ |