छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ
पृष्ठ 967, कुल 978 में से
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( ११३ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृ० |
|---|---|---|---|---|
| मासेभ्यः पितृलोकम् .... | ५ | १० | ४ | ५११ |
| मासेभ्यः संवत्सरम् .... | ४ | १० | २ | ५०० |
| यं यमन्तमभिकामः .... | ८ | २ | १० | ८२४ |
| य आत्मापहतपाप्मा .... | ८ | ७ | १ | ८६६ |
| य एते ब्रह्मलोके .... | ८ | १२ | ६ | ९३५ |
| य एष स्वप्ने महीयमानः .... | ८ | १० | १ | ८९४ |
| य एषोऽक्षिणि पुरुषः .... | ४ | १५ | १ | ४२० |
| यच्चन्द्रमसो रोहितँ रूपम् .... | ६ | ४ | ३ | ६१५ |
| यत्र नान्यत्पश्यति .... | ७ | २४ | १ | ७८६ |
| यथा कृतायविजितायाधरेयाः .... | ४ | १ | ४ | ३५७ |
| „ „ .... | ४ | १ | ६ | ३५९ |
| यथा विलीनमेवाङ्ग .... | ६ | १३ | २ | ६८१ |
| यथा सोम्य पुरुषम् .... | ६ | १४ | १ | ६८५ |
| यथा सोम्य मधु मधुकृतः .... | ६ | ९ | १ | ६६३ |
| यथा सोम्यैकेन .... | ६ | १ | ४ | ५७७ |
| यथा सोम्यैकेन नख० .... | ६ | १ | ६ | ५७९ |
| यथा सोम्यैकेन लोह० .... | ६ | १ | ५ | ५७९ |
| यथेह क्षुधिता बाला मातरम् .... | ५ | २४ | ५ | ५७२ |
| यदग्ने रोहितँ रूपम् .... | ६ | ४ | १ | ६१३ |
| यदादित्यस्य रोहितम् .... | ६ | ४ | २ | ६१५ |
| यदप उच्छुष्यन्ति .... | ४ | ३ | २ | ३७० |
| यदा वा ऋचमाप्नोति .... | १ | ४ | ४ | ८० |
| तदा वै करोत्यथ .... | ७ | २१ | १ | ७८२ |
| यदा वै निस्तिष्ठत्यथ .... | ७ | २० | १ | ७८१ |
| यदा वै मनुतेऽथ .... | ७ | १८ | १ | ७७९ |
| यदा वै विजानात्यथ .... | ७ | १७ | १ | ७७६ |
| यदा वै श्रद्दधात्यथ .... | ७ | १९ | १ | ७८० |
| यदा वै सुखं लभतेऽथ .... | ७ | २२ | १ | ७८३ |
| यदुदिति स उद्गीथः .... | २ | ८ | २ | १७१ |
| यदु रोहितमिवाभूदिति .... | ६ | ४ | ६ | ६२१ |
| यद्विज्ञातमिवाभूत् .... | ६ | ४ | ७ | ६२१ |
| यद्विद्युतो रोहितँ रूपम् .... | ६ | ४ | ४ | ६१६ |