चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)
Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation
महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( ११ ) कारण, अधर्म। अधर्म की युगों के के प्रकोप के कारण। स्रोतों के दोष का अनुसार उत्पत्ति और उसके दुष्परि- लक्षण। स्रोतों के प्रकृतिसिद्ध रूप। णाम। आयु के समय और परिणाम उपसंहार। विषयक अग्निवेश का प्रश्न तथा आत्रेय षष्ठोऽध्यायः (पृ० ५३०-५४१) ऋषि का प्रतिवचन। दैव और पुरुषकार रोगानीकं विमानम्—प्रभाव का लक्षण तीन प्रकार की आयु। आयु भेद से रोगों के प्रकार भेद। दश का काल। अकाल-मरण पर विचार। प्रकार के रोग। दो मानस दोष रजस् काल मृत्यु और अकाल मृत्यु पर विचार। और तमस्। इनके कुपित होने के तीन ज्वर में उष्ण जल देने विषयक प्रश्न। कारण अनुबन्ध्य-अनुबन्ध भेद से रोगों आत्रेय का उत्तर। ज्वर में उष्ण जल में भेद। बल के भेदों से शरीरस्थ अग्नि के गुण। निदान से विपरीत चिकित्सा। के चार प्रकार। अग्नि भेद से मनुष्यों अपतर्पण तीन प्रकार के उनके उपयोग के चार प्रकार वात, पित्त, कफ प्रकृति के अवसर। त्याज्य रोगी। उपसंहार। के पुरुषों का विवेचन। आरोग्य प्रकृति। चतुर्थोऽध्यायः सम प्रकृति। वातल, पित्तल और (पृ० ५१६-५२४) श्लेष्मल तीन प्रकार के रोगी। वात, त्रिविधरोगविशेषविज्ञानीयम्— पित्त और श्लेष्म प्रकृति के पुरुषों के तीन प्रकार के रोग विशेषों का विज्ञान लक्षण इनके अनुकूल आहार विहार। आप्तोपदेश, अनुमान और प्रत्यक्ष। उपसंहार। आप्तोपदेश का निरूपण। प्रत्यक्ष और सप्तमोऽध्यायः अनुमान के लक्षण। आप्तोपदेश से (पृ० ५४१-५५ ) क्या जानें। प्रत्यक्ष से क्या जानें। व्याधितरूपीयं विमानम्— अनुमान से क्या जानें उपसंहार। व्याधि के ज्ञान में भ्रम। चार प्रकार पञ्चमोऽध्यायः के कृमि। दो प्रकार का मल। उन में (पृ० ५२४-५३१) उत्पन्न कृमि। उनका प्रभाव और स्रोतोविमानम्—शरीर गत चिकित्सा। रक्तजन्य कृमि। पुरीषजन्य अनेक धातुवाही स्रोतों का वर्णन। कृमि। उनका उपाय अपकर्ष विधि, प्राणवह स्रोतों के दुष्ट होने पर लक्षण। प्रकृति विघात। कृमि-कोष्ठ के रोगी का जलवह स्रोत अन्नवह स्रोत। रसवह उपचार। आस्थापन बस्तिक्रिया की विधि। स्रोत। रक्तवह स्रोत। मांसवह स्रोत। विरेचन। अनुवासन। शिरो विरेचन। मूत्रवह स्रोत। पुरीषवह स्रोत। स्वेद- कृमियों के प्रकृतिविघात की रीति। वह स्रोत। स्रोतों के पर्याय। स्रोतों शिरोरोग पर चिकित्सा। उपसंहार।