भारतकोश
चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation

महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished639 पृष्ठ

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अ० १४ ] सूत्रस्थानम् १८१

मिट्टी ) मिट्टी का हो, तालाब, पुष्करिणी, बावड़ी अथवा बड़े तालाब के दक्षिण या पश्चिम किनारे पर, जहां पर किनारे का अच्छा घाट बना हो, जहां भूमि ऊंची नीची न हो, बिल्कुल समान हो। ( २ ) कूटागार निर्माण—वहां पर पानी से सात या आठ हाथ पीछे हटकर जलाशय के पश्चिम किनारे पर पूर्वा- भिमुख अथवा जलाशय के दक्षिण किनारे पर उत्तराभिमुख कूटागार बनाना चाहिये। यह कूटागार ऊंचाई में १६ हाथ और चौड़ाई में १६ हाथ चारों ओर से गोलाकार बहुत रोशनदानों वाला मिट्टी से लिपा पुता कर तैयार करना चाहिये। इस घर के अन्दर दिवार के चारों ओर किवाड़ तक एक हाथ भर ऊंची चबूतरी बनानी चाहिये। मध्य में चार हाथ विस्तृत पुरुष के परिमाण की मिट्टी से बनी, कन्दूक आकार की बहुत सूक्ष्म, छोटे २ छिद्रों वाला अंगार कोष्ठ रूप स्तम्भ बनाये, और इस का ढक्कन भी बनाये। ( ३ ) स्वेदन विधि- इस भाड़ को खैर, अश्वकर्ण ( बड़े पत्तों वाला ढाक ) की लकड़ियों से भरकर जला देवे। जिस समय यह मालूम हो जाए कि लकड़ियां भली प्रकार जल