भारतकोश
चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)

Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation

महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished639 पृष्ठ

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१८२ चरकसंहिता [अ० १४ व्यपोज्झ्य सर्वानङ्गारान् प्रोक्ष्य चोष्णवारिणा । तां शिलामथ कुर्वीत कौषेयाविक-संस्तराम् ॥ ४८ ॥ तस्यां स्वभ्यक्तसर्वाङ्गः स्वपन् स्विद्यति ना सुखम् । कौरवाजिन-कौषेय-प्रावाराद्यैः सुसंवृतः ॥ ४९ ॥ इत्युक्तोऽश्मघनस्वेदः, कर्पूस्वेदः प्रवक्ष्यते । ( ७ ) अश्मघन स्वेद विधि—पुरुष लेट सके, इतनी बड़ी लम्बो, चौड़ी, मजबूत पत्थर की बनी शिला को; वातनाशक ( देवदारु या अगर आदि ) लकड़ियां जलाकर गरम करे । गरम होने पर सब अंगारों को दूर हटा दे, शिला पर गरम पानी छिड़क देवे ( जिससे कि ऊपर की गरमी बाहर हो जाये ) सब अंगों पर तैल का अभ्यङ्ग करके मनुष्य सोता हुआ सूत का चादर, मृग चर्म, रेशमी चादर कम्बल आदि भली प्रकार ओढ़कर सुख पूर्वक स्विन्न होता है । इस प्रकार अश्मघन स्वेद बता दिया गया. अब कर्पू-स्वेद बताया जाता है ॥४७-४९॥ खानयेच्छयनास्याधः कर्पू, स्थानविभागवित् ॥ ५० ॥ दीप्तैरधूमैरङ्गारैस्तां कर्पू पूरयेत्ततः । तस्यामुपरि शय्यायां स्वपन् स्विद्यति ना सुखम् ॥ ५१ ॥ ( ८ ) कर्पू-स्वेद विधि—स्थान के विभाग को जानने वाला वैद्य शय्या के नीचे हाण्डा के आकार का एक गोल गड्ढा बनावे। इस गड्ढे को जलते हुए परन्तु धूमरहित अंगारों से भर दे । इस गड्ढे के ऊपर खाट बिछाकर लेटने से सुख पूर्वक पसीना आता है ॥ ५०-५१ ॥ अनत्युत्सेधविस्तारां वृत्ताकारामलोचनाम् । घनभित्तिं कुटीं कृत्वा कुष्ठाद्यैः संप्रलेपयेत् ॥ ५२ ॥ कुटीमध्ये भिषक्शय्यां स्वास्तीर्णां चोपकल्पयेत् । प्रावाराजिन-कौषेय-कुथ-कम्बल-गोलकैः ॥ ५३ ॥ हसन्तिकाभिरङ्गार-पूर्णाभिस्तां च सर्वशः । परिवार्यान्तरास्तेह्यभ्यक्तः स्विद्यते सुखम् ॥ ५४ ॥ ( ६ ) कुटीस्वेद विधि-न बहुत ऊंची और न बहुत चौड़ी गोलाकार, रोशनदान रहित (जिसमें वायु के लिये छेद न हों) तथा मोटी दीवारों वाली कुटी बनाये । इस घर को अन्दर से कुष्ठ आदि उष्णवोर्य द्रव्यों से लेप देना चाहिये । इस लिपी कुटी के बीच में वैद्य लम्बी, चौड़ी शय्या बनाये । इस शय्या के चारों ओर अंगारों से भरी अंगीठियां रख देवे । फिर व्याघ्रचर्म, मृगचर्म, रेशम, कम्बल, चित्र विचित्र गरम वस्त्र शय्या पर बिछाकर, लपेट लेने चाहिये । शरीर