चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)
Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation
महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)
पृष्ठ 267, कुल 639 में से
संदर्भ में पढ़ेंअ० २१ ] सूत्रस्थानम २५६ त्वगस्थिशेषोऽतिकृशः स्थूलपर्वा नरो मतः ॥१५॥ सततव्याधितावेतावतिस्थूलकृशौ नरौ । सततं चोपचर्यौ हि कर्षणैर्बृंहणैरपि ॥१६॥ स्थौल्यकार्श्ये वरं कार्श्यं समोपकरणौ हि तौ । यद्युभौ व्याधिरागच्छेत्स्थूलमेवातिपीडयेत् ॥१७॥ रूक्ष खान पान के सेवन से, उपवास से थोड़ा खाने से, स्नेहन, स्वेदन वमन, विरेचन आदि क्रियाओं के अतियोग से, शोक से, मल-मूत्र के उपस्थित वेगों को अथवा नींद के उपस्थित वेग को रोकने से, स्नेह मर्दन किये बिना उबटन लगाकर स्नान ( नित्य प्रति ) करने से, स्वभाव से, बुढ़ापे से, रोगों के कारण ( रोग की कमजोरी में ) उत्पन्न कमजोरी में, मिथ्याहार-विहार से, क्रोध से पुरुष बहुत कृश हो जाता है। परिश्रम, अतिशय पेट भर के खाना, भूख, प्यास और बलवान् औषध, बहुत सर्दी, बहुत गरमी और मैथुन इनको कृश पुरुष सहन नहीं कर सकता। प्लीहा कास, क्षय, श्वास, गुल्म, अर्श, उदर-रोग, और ग्रहणी रोग ( आमाशय आंत्र रोग ) प्रायः करके कृश ( निर्बल ) पुरुष को शीघ्र चिपटते हैं। नितम्ब, उदर और ग्रीवा शुष्क हो जाते हैं, शरीर पर धमनियों के जाल दीखने लगते हैं, त्वचा और अस्थियों का ही ढांचा बन जाता है, ग्रन्थियां मोटी-मोटी हो जाती हैं, ऐसे पुरुष को 'अतिकृश' कहते हैं। ये अतिस्थूल और अतिकृश पुरुष सदा रोगी रहते हैं। इसलिए कर्षण से ( स्थूल की ) और बृंहण से ( कृश पुरुष की) सदा परिचर्या करनी चाहिये। स्थूलता और कृशता में कृशता श्रेष्ठ है, क्योंकि यदि दोनों को एक ही समान चिकित्सा से साध्य व्याधि हो जाय तो स्थूल पुरुष ही अधिक पीड़ित होगा ( क्योंकि स्थूल पुरुष का यदि संतर्पण किया जाय तो स्थूलता बढ़ती है, अपतर्पण करे तो वह सहन नहीं कर सकता, क्योंकि जाठराग्नि बढ़ी होती है ) ॥११-१७॥ सम-मांस-प्रमाणस्तु समसंहननो नरः । दृढेन्द्रियत्वादू व्याधीनां न बलेनाभिभूयते ॥ १८ ॥ क्षुत्पिपासातपसहः शीत-व्यायाम-संस्सहः । समपक्ता समजरः सम-मांस-चयो मतः ॥ १६ ॥ जिस पुरुष की मांस पेशियां प्रमाण में उन्नत हैं और शरीर का संघटन ठीक प्रकार से है, इन्द्रियां बलवती हैं, वह पुरुष रोगों के बल से भी हार नहीं मानता। जो पुरुष भूख, प्यास, धूप का सहन कर सके, शीत, व्यायाम को