चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)
Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation
महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)
पृष्ठ 586, कुल 639 में से
संदर्भ में पढ़ें५६८ चरकसंहिता [अ० ८ अनभ्यस्त शास्त्र वाले या अल्पबुद्धि के लिये वक्र, लम्बे २ सूत्रों से बने वाक्यों का प्रयोग करे। प्रतिभा से हीन के लिये अनेकार्थवाची, अनेक प्रकार के वचनों का प्रयोग करे। वचन-शक्ति से हीन को आधे ही वाक्य पर टोक दे। अपण्डित या अचतुर को (जिसने कभी पहिले सभा नहीं देखी हो) लज्जाजनक वाक्यों से पराजित करना चाहिये, क्रोधी व्यक्ति को तंग करके, डरपोक को भय दिखला कर, जो सावधान न हो उसको मन के नियमन करने वाले वचनों से पराजित करे। इन नाना उपायों द्वारा प्रतिवादी का शीघ्र पराजय करे ॥२१॥ तत्र श्लोकौ—विगृह्य कथयेद्युक्त्या युक्तं च न निवारयेत् । विगृह्यभाषा तीव्रं हि केषांचिद् द्रोहमावहेत् ॥ २२ ॥ नाकार्यमस्ति क्रुद्धस्य नावाच्यमपि विद्यते। कुशला नाभिनन्दन्ति कलहं सहिताः सताम् ॥ २३ ॥ एवं प्रवृत्ते वादे कुर्यात् ॥ २४ ॥ प्रतिलोम संभाषण करने का प्रकार—दूसरे के साथ विगृह्य-संभाषण करते हुए युक्तिपूर्वक भाषण करे। युक्ति प्रमाणानुकूल दूसरे के वचन का निषेध नहीं करे। जल्प कई पुरुषों में तीव्र क्रोध उत्पन्न कर देता है। क्रुद्ध व्यक्ति के लिये कुछ भी अकार्य नहीं होता, वह कुछ भी कर सकता है। उसके लिये कुछ भी अवाच्य नहीं, वह सब कुछ बुरा-भला भी कह सकता है। इसलिये बुद्धिमान् पुरुष सज्जनों की सभा में कलह को अच्छा नहीं समझते। वाद चलने पर इस प्रकार करे ॥ २२-२४ ॥ प्रागेव तावदिदं कर्तुं यतेत—संधाय परिषदाऽयनभूतमात्मनः प्रक- रणमादेशयितव्यं यद्वा परस्य भृशदुर्गं स्यात्, पक्षमथवा परस्य भृशं विमुखमानयेत् परिषदि, परिषदि चोपसंहितायामशक्यमस्माभिर्वक्तुम्, एषैव ते परिषदयथेष्टं यथायोगं यथाभिप्रायं वादं वादमर्यादां च स्थाप- यिष्यतीत्युक्त्वा तूष्णीमासीत ॥ २५ ॥ वाद प्रारम्भ होने से पूर्व निम्न बातें करने का यत्न करे। यथा—परिषद् (सभ्यों) से मिलकर अपने अभ्यास किये हुए प्रकरण या विषय का निर्देश करे। अथवा जो प्रकरण वा विषय दूसरे को बहुत दुर्बोध हो उसे कहे अथवा दूसरे का पक्ष जो बहुत अधिक झगड़ा उत्पन्न करने वाला हो, वहां पर सभ्यों के बीच कहे। यदि परिषद् अपने विरोध में जान पड़े तो कहे कि—'इस परि- षद् को तो तुमने पहिले ही मिलकर अपने पक्ष में कर लिया है, इसलिये हमारा बोलना असम्भव है। यह तो तुम्हारी घर की ही सभा है। जैसा चाहोगे, जैसा