चरक संहिता (प्रथम भाग: सूत्र, निदान, विमान, शारीर व इन्द्रिय स्थान)
Charaka Samhita Part 1 with Hindi Translation
महर्षि चरक व अग्निवेश द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअ० ४ ] सूत्रस्थानम् ५३ हरिद्रा-मञ्जिष्ठा-सुवहा-सूक्ष्मैला-पालिन्दी-चन्दन-कतक-शिरीष- सिन्धुवार-श्लेष्मातका इति दशेमानि विषघ्नानि भवन्ति ॥ ( १६ ) ॥ इति षट्कः कषायवर्गः ॥ [ ३ ] ॥ हरिद्रा ( हल्दी ), मञ्जिष्ठा ( मंजोट ) सुवहा (निशोथ), सूक्ष्मैला ( छोटी इलायची ), पालिन्दी (काली निशोथ), चन्दन (लाल चन्दन), कतक ( निर्मली का जल को शोधन करने वाला फल ), शिरीष ( सिरस ), सिन्धुवार (सम्भालु, निर्गुण्डी ), श्लेष्मातक ( लिसाड़ा ), ये दस 'विषघ्न' अर्थात् विषनाशक हैं ॥ यह छः से बना हुआ कषायवर्ग है । वीरण-शालि-षष्टिकेशुवालिका-दर्भ-कुश-काश-गुन्द्रेत्कट-कत्तृण-मूला- नीति दशेमानि स्तन्यजननानि भवन्ति ॥ ( १७ ) ॥ वीरण ( खस ), शालि ( हेमन्त ऋतु में पकने वाले धान्य का चावल ), षष्टिक (साटी चावल), ईक्षुवालिका ( ईख ), दर्भ ( दाभ ), कुश ( कुशा ), काश ( सरकण्डा ), गुन्द्रा ( होंगला ) इत्कट, ( तृण विशेष ) कत्तृण ( रोहिष तृण ) ये दस 'स्तन्य-जनन' अर्थात् दूध बढ़ाने वाले हैं। इन में गिलोय को छोड़कर सब के मूल काम में लाने चाहिये ॥ पाठा-महौषध-सुरदारु-मुस्त-मूर्वा-गुडूची-वत्सक-फल-किराततिक्त- क-कटुरोहिणी-सारिवा इति दशेमानि स्तन्यशोधनानि भवन्ति ॥(१८)॥ पाठा ( पाढ़ल ), महौषध ( सोंठ ), सुरदारु ( देवदारु ), मुस्त ( नागर- मोथा ), मूर्वा ( मोर बेल ), गुडूची ( गिलोय ), वत्सक फल ( इन्द्र जौ ), किराततिक्तक ( चिरायता ), कटुरोहिणी ( कटुकी ), सारिवा ( अनन्त मूल ) ये दस 'स्तन्यशोधन' दूध को शुद्ध करने वाले हैं ॥ जीवकर्षभक-काकोली-क्षीरकाकोली-मुद्गपर्णी-माषपर्णी-मेदा-वृद्ध- रुहा-जटिला-कुलिङ्गा इति दशेमानि शुक्रजननानि भवन्ति ॥( १९ )॥ जीवक, ऋषभक, काकोली, क्षीर काकोली, मुद्गपर्णी ( मूंगपर्णी ) माष- पर्णी ( उड़दपर्णी ); मेदा, वृद्धरुहा ( शतावरी ), जटिला ( जटामांसी ), कुलिंग ( उतंगण ) ये दस 'शुक्रजनन' अर्थात् वीर्य-धातु के वर्धक होते हैं १ ॥ १. ( क ) जीवक ऋषभक, मेदा महामेदा, काकोली, क्षीरकाकोली, ऋद्धि वृद्धि इन के स्थान पर परिभाषा आदेश से, शतावरी, विदारीकन्द अश्वगन्धा और वाराही कन्द प्रयोग करने चाहियें । ( ख ) कुलिंगशब्द धन्व- न्तरि निघण्टु में, 'विष्किर'पक्षियो के लिये और समार्थकों में दूर्वा के लिये आया है ।