चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)
Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation
महर्षि चरक व दृढ़बल द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)
पृष्ठ 12, कुल 616 में से
संदर्भ में पढ़ें[ ११ ]
महापञ्चगव्य घृत, ब्राह्मी घृत। अपस्मार नाशक अनेक योग, अपस्मार नाशक नस्य । तीन योग अञ्जन । धूपन । अत- त्त्वाभिनिवेश नामक महारोग । चिकि- त्सा । उपसहार । एकादशोऽध्यायः (पृ० ४७४-४८६) क्षतक्षीणचिकित्सितम्—कारण और सम्प्राप्ति । लक्षण । चिकित्सा । अनेक योग । अमृतप्राश घृत । श्वदंष्ट्रादि घृत । सक्तु प्रयोग । सर्पिर्गुड के चार योग । सर्पिर्मोदक । सैन्धवादि चूर्ण । षाडव । उपसहार । द्वादशोऽध्यायः (पृ० ४८६-५१२) श्वयथुचिकित्सितम्—कारण । दो भेद-निज और आगन्तुज । निज शोथ के भेद । सम्प्राप्ति, पूर्वरूप सामान्य लक्षण । पैत्तिक शोथ कफजन्य शोथ असाध्य शोथ । शोथ के उपद्रव । साध्य शोथ । आमजन्य शोथ की चिकित्सा । अपथ्य । चिकित्सा । अनेक योग । गण्डीराद्यरिष्ट । अष्टशतारिष्ट । पुनर्न- वाद्यरिष्ट । फलत्रिकाद्यरिष्ट । क्षार गुडिका, गुडार्द्रक प्रयोग । शिलाजतु प्रयोग । कसहरीतकी । पटोलमूलाद्य घृत । चित्रकाद्य घृत, चित्रक घृत । जीवन्त्यादि यवागू । अन्य पथ्य, शाक- शैलेयादि तैल, प्रदेह । पैत्तिक शोथ चिकित्सा । कफजन्य शोथ चिकित्सा । शोफ रोगी को उबटन । बिडालिका का लक्षण-तालु विद्रधि । उपजिह्विका, उपकुश । गलगण्ड-गण्डमाला चिकित्सा, ग्रन्थि । चिकित्सा—असाध्यग्रन्थि ।
बिदारिका-विस्फोटक-कक्षा । रोमान्तिका- मसूरिका-वृद्धिगेग । भगन्दर-चिकित्सा, श्लीपद-जालगर्दभ-चिकित्सा । उप- सहार-आगन्तुज शोथ । उपसहार । त्रयोदशोऽध्यायः (पृ० ५१२-५४५) उदरचिकित्सितम्—अग्निवेश का निवेदन-आत्रेय ऋषि का उपदेश । उदर रोग के सामान्य कारण । उदर रोग के पूर्व रूप । रूप । वातोदर के कारण और लक्षण । पित्तोदर के कारण- लक्षण । कफोदर के कारण-लक्षण । सन्निपातोदर के कारण और लक्षण । प्लीहोदर । यकृत्प्लीहोदर । बद्धगुदोदर लक्षण । छिद्रोदर-लक्षण । उदकोदर- लक्षण । असाध्य रोगी । वातोदर की चिकित्सा । पित्तोदर की चिकित्सा । कफोदर की चिकित्सा । अनेक योग । रोहितक घृत । बद्धगुदोदर की चिकित्सा, छिद्रोदर की चिकित्सा । उदकोदर की चिकित्सा । अपथ्य । उदर रोग पर तक्र का प्रयोग । दुग्धयोग लेप-परिषेचन, अवसेचन, अष्टमूत्र प्रयोग । दीपनीय घृत । पञ्चकोल घृत । नागराद्य घृत । चित्रक घृत । यवाद्य घृत । पटोलमूला- दिचूर्ण । गवाक्ष्यादि चूर्ण । नारायण चूर्ण । हबुषाद्य चूर्ण, नीलिन्याद्य चूर्ण । अन्य अनेक योग । वर्धमान-पिप्पली विधि से हरड़ का सेवन । दूष्योदर (सन्निपातोदर) में दन्त्यादि तैल । वातोदर में सरलादि तैलाभ्यंग । अरिष्टों के प्रयोग । उदकोदर पर अज्ञकरीषादि क्षार योग । अन्य अनेक योग-उदर-