चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)
Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation
महर्षि चरक व दृढ़बल द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)
पृष्ठ 133, कुल 616 में से
संदर्भ में पढ़ें११८ चरकसंहिता [ अ० ८ तैन्दुकैङ्गुदानि च काष्ठान्यग्निसंधुक्षणानि, स्त्रियश्च बह्वयो बहुशः प्रजाताः सौहार्दयुक्ताः सततमनुरक्ताः प्रदक्षिणाचाराः प्रतिपत्तिकुशला प्रकृति- वत्सलास्त्यक्तविषादा क्लेशसहिष्ण्योऽभिमताः, ब्राह्मणाश्चाथर्ववेदविदो यच्चान्यदपि तत्र समर्थं मन्येत, यच्चान्यच्च ब्राह्मणा ब्रूयुः स्त्रियश्च वृद्धाः, तत् तत् कार्यम् ॥ ३३ ॥ इस सूतिकागार में घी, तैल, शहद, सैन्धा नमक, सौवर्चल, काला नमक विडूर- नमक बिडंग, कूठ, देवदारु, सोंठ, पिप्पली, पिप्पलीमूल, गजपिप्पली, मण्डूक- पर्णी, एला, लागली, वच, चव्य, चित्रक, करज, हींग, सरसों, लहसुन, निर्मली कण, कणिका (मोटे चावल, चावलों की कणिया), कदम्ब, अलसी, बल्वज, भोजपत्र, कुलत्थी, मैरेय, सुरा आसव ये वस्तुए पास में होनी चाहियें। द पत्थर, दो छोटे मूसल, दो ऊखल, चण्ड वृषभ, दो तीक्ष्ण सूई रखने के पात्र (सूई समेत), सोना चांदी से बने शस्त्र, तीक्ष्ण लोहे से बने औज़ार, बेल की लकड़ी से बने दो पलंग, अग्नि में जलाने के लिये तिन्दुक और हिंगोट की लकड़िया । जिन्होंने बहुत सी संतान उत्पन्न की हो, स्नेह करने वाली, सौहार्द युक्त, न घबराने वाली, कर्म में कुशल उत्तम सूझ वाली, स्वभाव से प्रेम रखने वाली, आलस्य रहित, क्लेश को सहन करने वाली ऐसी अनेक स्त्रिया रहनी चाहियें। अथर्ववेद को जानने वाले ब्राह्मण और अन्य ब्राह्मण और वृद्ध स्त्रिया जो २ बतायें वह २ करना चाहिये ॥३३॥ ततः प्रवृत्ते नवमे मासे पुण्येऽहनि प्रशस्तनक्षत्रयोगमुपगते प्रशस्ते भगवति शशिनि कल्याणे करणे मैत्रे मुहूर्ते शान्तिं कृत्वा गोब्राह्मणम- ग्निमुदकं चादौ प्रवेश्य गोभ्यस्तृणोदकं मधुलाजांश्च प्रदाय ब्राह्मणेभ्यो- ऽक्षतान्सुमनसो नान्दीमुखानि च फलानीष्टानि दत्त्वा, उदकपूर्वमास- नस्थेभ्योऽभिवाद्य पुनराचम्य स्वस्ति वाचयेत्, ततः पुण्याहशब्देन गोब्राह्मणमनुवर्तमाना प्रदक्षिणं प्रविशेत्सूतिकागारं, तत्रस्था च प्रसव- काल प्रतीक्षेत ॥ ३४ ॥ नवम मास आरम्भ होने पर पवित्र दिन में, प्रशस्त नक्षत्र के साथ भग- वान् चन्द्रमा का योग होने पर, कल्याणकारो मित्र मुहूर्त्त में, शान्ति होम करके गाय, ब्राह्मण, अग्नि और पानी का प्रथम प्रवेश करावे । गायो को घास, पानी और शहद तथा लाजा देनी चाहिये । ब्राह्मणों को आसन पर बैठा कर अक्षत, फल, नान्दीमुख श्राद्ध मे उपयोगी फल (खजूर आदि) जल सहित प्रदान करके आचमन करके स्वस्तिवाचन करावे । इसके पीछे मांगलिक शब्दों के