भारतकोश
चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation

महर्षि चरक व दृढ़बल द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished616 पृष्ठ

पृष्ठ 208, कुल 616 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 208

१६४ चरकसंहिता [ अ० १२ तथा हि सिद्धि च यशश्च शाश्वतं स सिद्धकर्मा लभते धनानि च ॥ ६० ॥ इस इन्द्रिय स्थान में जिन जिन बातों का वर्णन किया है, वे बातें वैद्य को अवश्य भली प्रकार जाननी चाहियें । इनको जाननेवाला वैद्य ‘सिद्धकर्मा’ होता है और उसकी चिकित्सा सदा सफल होती है । इससे उसको निरन्तर यश और धन मिलता है ॥ ६० ॥ इत्यग्निवेशकृते तन्त्रे चरकप्रतिसंस्कृते इन्द्रियस्थाने गोमयचूर्णी- यमिन्द्रिय नाम द्वादशोऽध्यायः ॥ १२ ॥ इतीन्द्रियस्थानं सम्पूर्णम् ।

चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान) · पृष्ठ 208, कुल 616 में से · BharatKosha