भारतकोश
चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation

महर्षि चरक व दृढ़बल द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished616 पृष्ठ

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पा० १ ] चिकित्सितस्थानम् २०३ आढ़क * इन सब को औदुम्बर ( ताम्र ) के कलई किये बर्त्तन मे कोमलाग्नि पर पाक करना चाहिये । जब लेह भली प्रकार बन जाये और जले नहीं, तब उतार लेना चाहिये । ठण्डा होनेपर इसमें शहद मिलाना चाहिये । शहद की मात्रा घी और तेल की मात्रा से आधी होनी चाहिये । इन सब को घी से भावित पात्र मे रखना चाहिये । मात्रा ओर समय को देख कर इतना इस अवलेह का खाये जो पच जाये और भूख को नष्ट न करे । [ साधारण मात्रा एक तोला ] । सेवन करनेवाला व्यक्ति पूर्ववत् आहार राशि का उपयोग करे । इस अवलेह के जीर्ण होने पर दूध के साथ साठी चावलों का भात खाना चाहिये ॥ ४०-५२ ॥ वैखानसा बालखिल्यास्तथा चान्ये तपोधनाः । रसायनमिदं प्राप्य बभूवुरमितायुषः ॥ ५३ ॥ मुक्त्वा जीर्णं वपुश्चाग्र्यमवापुस्तरुणं वयः । वीत तन्द्रा-क्लम-श्वासा निरातङ्काः समाहिताः ॥ ५४ ॥ मेधा-स्मृति-बलोपेताश्चिररात्रं तपोधनाः । ब्राह्मं तपो ब्रह्मचर्यं चेरुश्चात्यन्तनिष्ठया ॥ ५५ ॥ रसायनमिदं ब्राह्ममायुष्कामः प्रयोजयेत् । दीर्घमायुर्वयश्चाग्र्यं कामांश्चेष्टान् समश्नुते ॥ ५६ ॥ इति ब्राह्मरसायनम् । वैखानस, बालखिल्य और अन्य तपस्वी लोगों ने इस रसायन के सेवन से अपरिमित आयु प्राप्त की । जीर्ण, शीर्ण, वृद्ध शरीर त्याग कर नया सुन्दर जवान शरीर और आयु पाई । इसके सेवन से तपस्वी लोग तन्द्रा, क्लम (थकान) श्वास (श्रमजन्य) से रहित, नीरोग, मेधा, स्मृति, बल से युक्त होकर बहुत

  • परिभाषा-नियम से, घी और तैल द्विगुण करना चाहिये । अष्टांग-संग्रह में यह योग आया है । वहा पर दुगने का विधान दिया है । यहा पर सब घी, तैल, क्वाथ, चूर्ण, मिश्री को एक साथ पाक करने की विधि बतलाई है । यदि इनको पृथक् पृथक् भी पकाये तो भी कार्य हो जायेगा । हरड़ और आवले तो घी और तैल में भून कर रख ले । इस पिट्ठी को क्वाथ और मिश्री में मिला कर पाक करें । आसन्न पाक होने पर मण्डूकपर्णी आदि का चूर्ण मिला कर उतार लें और शीतल होने पर शहद मिला देवें । हरड़ और आवले को भूनते समय लोहे की कड़ाही या कोंचे का उपयोग न करके कलई वाले पात्र तथा लकड़ी का प्रयोग करना उत्तम है ।