भारतकोश
चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation

महर्षि चरक व दृढ़बल द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished616 पृष्ठ

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पृष्ठ 252

२३८ चरकसंहिता [ अ० १

इन आठ (नवीं सोम ) ओषधियों में जो जो भी ओषधि मिल सके उसका
स्वरस पेट भर कर पीना चाहिये । फिर घी, तैल आदि स्नेह से भावित, ताजे
(गीले) ढाक की लकड़ी से बनी, ढक्कन से युक्त द्रोणी (नांद) में नंगा
होकर लेट जाना चाहिये । वहा पर वह छः मास तक अचेत रहता है। [छः
मास के पीछे अ.हार सेवन से सज्ञा-लाभ होता है ]। इस समय बकरी के दूध
से इसे स्वस्थ रखना चाहिये । [छः मास के पीछे वह वय, वर्ण, स्वर,
करेणुस्तत्र कन्या च छत्रातिच्छत्रके तथा ॥
मण्डलैः कपिलैश्चित्रैः सर्पाभा पञ्चपर्णिनी ।
पश्चारत्निप्रमाणा वा विज्ञेयाऽजगरो बुधैः ॥
दृश्यतेऽजगरी नित्य गोनसी चाम्बुदागमे ।
अजास्तनाभकन्दा तु सक्षीरा क्षुपरूपिणी ॥
अजा महौषधिर्ज्ञेया शङ्खकुन्देन्दुपाण्डुरा ।
छत्रातिच्छत्रके विद्याद् रक्षोघ्ने कन्दसम्भवे ॥
जरामृत्यु निवारिण्यौ श्वेतकापोतसंस्थिते ।
सुश्रुत० चि० अ० ३० ।
(१) ब्रह्म सुवर्चला पीले से, स्वर्ण तुल्य रग की, जल के स्थानों के तीर
पर फैला करते हैं । वह दूध वाली पद्मिनी के समान होती है (२) आदित्य
पर्णी—मूलवाली, खूब लाल नाडियों वाले कोमल २ पाच पत्तों वाली, सदा सूर्य
के अनुसार रहती है। (३) कन्या—सुन्दर मोर के पँखों के समान १२ पत्र
होते हैं, मूल में एक छोटा सा गोल कन्द होता है दूध सोने के समान पीला होता
है । काश्मीर में क्षुद्रक मानस ( छोटा मानसरोवर ) नामक एक दिव्य बड़ा
तालाव है। वहा करेणु, कन्या, छत्रा अति छत्रा नाम की ओषधिया उत्पन्न
होती हैं। (४) अजगरी—पीले चितकबरे, गोल २ चकत्तों मे चित्रित, उसका
रूप साप के सामान होता है, उसके पाच पत्ते होते हैं, उसकी लम्बाई भी पाच
बालिश्त होती है, वर्षा काल में वह दीखती है। (५) गोनसी—इसी प्रकार
गोनसी नाम की ओषधि भी वर्षा काल में ही दीखती है। (६) अजा—अजा
ओषधि शख या कुन्द के पुष्प के समान श्वेत रंग की है, उसका छोटा सा
पौधा होता है, जड़ में बकरी के स्तन के समान कन्द होता है। (७-८)
छत्रा और अतिछत्रा ये दोनों कन्द से उत्पन्न होती हैं श्वेत कबूतर के समान
दिखाई देती हैं, वे दोनों दुष्ट आत्माओं के बुरे प्रभाव को नाश करने वाली,
बुढ़ापा और मौत को दूर करती हैं ।