भारतकोश
चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation

महर्षि चरक व दृढ़बल द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished616 पृष्ठ

पृष्ठ 253, कुल 616 में से

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पा० ४ ] चिकित्सितस्थानम् २३६ आकृति, जरु और प्रभा में देवताओं की तुलना करने लगता है ] सब विद्यायें, भाषायें स्वयं ही उपस्थित हो जातो हैं ( वह उनको जान जाता है )। कान और आंखें दिव्य हो जाती हैं, एक हजार योजन तक बिना थके चल सकता है, बिना रोग आदि उपद्रवों के एक हजार वर्ष की आयु भोगता है । * [ दूध देने के लिये ढक्कन में मुख की सीध में छेद बना कर नाली द्वारा दूध देना चाहिये । जिससे वह लेटा लेटा दूध पी सके । श्वास के लिये अन्य छिद्र रखने चाहियें ] ॥ ७ ॥ भवन्ति चात्र—दिव्यानामौषधीनां यः प्रभावः स भवद्विधैः । शक्यः सोढुमशक्यस्तु स्यात् सोढुमकृतात्मभिः ॥ ८ ॥ ओषधीनां प्रभावेण तिष्ठतां स्वे च कर्मणि । भवतां निखिल श्रेयः सर्वमेवोपपत्स्यते ॥ ६ ॥ वानप्रस्थैर्गृहस्थैश्च प्रयत्नैर्नियतात्मभिः । शक्या ओषधयो ह्येताः सेवितु विषयाम्भिजाः ॥ १० ॥ तासु क्षेत्रगुणैस्तेषां मध्यमेन च कर्मणा । मृदुवीर्यतया तासां विधिज्ञेयः स एव तु ॥ ११ ॥ पर्यैष्टुं ताः प्रयोक्तुं वा येऽसमर्थाः सुखार्थिनः । रसायनविधिस्तेषामयमन्यः प्रशस्यते ॥ १२ ॥ दिव्य औषधियों का जो प्रभाव है, उसको आप जैसे ही सहन कर सकते हैं । पापी पुरुषों के लिये उनका सहन करना असम्भव है। अपने मार्ग में ( शम, तप आदि साधन करते हुए ) स्थिर रहते हुए औषधियों के प्रभाव से आप लोगों को सम्पूर्ण श्रेय प्राप्त हो जायेगा। वानप्रस्थी, गृहस्थी तथा जो प्रयत्नशील और संयमी पुरुष हैं, वे भी अपने योग्य पुण्य देश में उत्पन्न औष- धियों का सेवन कर सकते है। दिव्य औषधियां अपुण्य देश में उत्पन्न होती ही नहीं, यदि कदाचित् हो जायें तो निर्वीर्य हो जाती हैं। इन साधारण देशों में उत्पन्न दिव्य औषधियों का वीर्य हिमालय की औषधियों से मृदु ( हीन ) रहता है। इसका कारण क्षेत्र ( जहाँ पर ये उत्पन्न होती हैं ), गुण और कर्म ( जरा, व्याधि-नाश रूप ) का मध्यम होना है। इनके प्रयोग की विधि वही है, जो कि हिमालय में उत्पन्न औषधियों की है। सुख, आरोग्य को चाहने वाले जो व्यक्ति इन दिव्य औषधियों को ढूंढने या प्रयोग करने की मेहनत नहीं कर सकते उनके लिये दूसरी रसायन विधि हितकर है ॥ ८-१२ ॥

  • प्रलीयते का अर्थ अदृश्य होना भी कहते हैं ।
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