भारतकोश
चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation

महर्षि चरक व दृढ़बल द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished616 पृष्ठ

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पृष्ठ 337

स्तुवन्नामसहस्रेण ज्वरान् सर्वानपोहति । ब्रह्माणमश्विनाविन्द्रं हुतभक्षं हिमाचलम् ॥ ३१२॥ गङ्गां मरुद् गणांश्चेष्ट्या पूजयञ्जयति ज्वरान् । भक्त्या मातापितॄणां च गुरूणां पूजनेन च ॥ ३१३ ॥ ब्रह्मचर्येण तपसा सत्येन नियमेन च । जपहोमप्रदानेन वेदानां श्रवणेन च ॥ ३१४ ॥ ज्वराद्विमुच्यते शीघ्रं साधूनां दर्शनेन च । ज्वरे रसस्थे वमनमुपवासं च कारयेत् ॥ ३१५ ॥ सेकप्रदेहौ रक्तस्थे तथा सशमनानि च । विरेचनं सोपवासं मासमेदःस्थिते हितम् ॥ ३१६ ॥ अस्थिमज्जगते देया निरूहाः सानुवासनाः । आगे विषम ज्वर नाशक योगों को कहते है । बुद्धिमान् को चाहिये कि दोष आदि की विवेचना करके इनका प्रयोग करे । (१) विषमज्वर मे पीने के लिये मण्ड युक्त सुरा, खाने के लिये कुक्कुट का मास, तीतर, मोर देने चाहिये । अथवा गुल्म रोग मे कहे पट्पल घृत अथवा हरड या त्रिफला का क्वाथ, अथवा गिलोय का रस पान करे । (२) प्रथम स्नेहन और स्वेदन लेकर ज्वर के आक्रमण के समय नीलिनी (नील), अजगन्धा, निशोथ और कुटकी इनका क्वाथ पीवे । अथवा घी की प्रभूत मात्रा पीकर वमन करे या खूब खा पीकर वमन कर दे । अथवा अन्न के साथ खूब मद्य पीकर सो जावे । अथवा आस्थापन और मुस्तादि तीन बस्तिया जो कि सिद्धि स्थान मे कहेगे उनका प्रयोग करे । (३) जिस दिन ज्वर चढता हो उस दिन बिल्ली के पुरीष को दूध के साथ पीना चाहिये । अथवा बैल के गोबर को दधिमण्ड, सुरा ओर नमक के साथ लेवे । [ये सब वमन कराने के उपाय प्रतीत होते है । घृणित वस्तुओ से सम्भवत वमन आ जाये ] । (४) विषम ज्वर मे पिप्पली, त्रिफला, दही, छाछ, घी, पचगव्य (दूध, घी, गोमूत्र, गोमय रस और दही या अपस्मारोक्त पचगव्य घृत) और दूब का प्रयोग करे । (५) भोजन से पूर्व तैलयुक्त लहसुन का उपयोग करे । इसी प्रकार पवित्र या मेदुर तथा उष्णवीर्य मासो को खावे । (६) विषम ज्वर मे व्याघ्र की वसा मे हीग और सैन्धा नमक मिला कर नस्य दे । अथवा पुरातन घृत, सिंह की वसा (चर्बी) को सैन्धानमक के साथ मिला कर उसका नस्य देवे । (७) विषम ज्वर मे—सैन्धा नमक, पिप्पली के निस्तुष दाने, मनसिल इनको तेल मे पीस कर नस्य देवे । (८) गुग्गुलु, नीम के पत्ते, वच, कूठ, हरड, सरसो, जौ और