भारतकोश
चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation

महर्षि चरक व दृढ़बल द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished616 पृष्ठ

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[ ३ ] लोक और पुरुष की समानता। सर्व लोको में आत्म-बुद्धि और आत्मा मे सर्वलोक-बुद्धि, मोक्षमार्ग पर प्रथम ज्ञानचरण। हेतु, जन्म, उपप्लव, वियोग, भग, उपरम प्रवृत्ति, विकृति, सत्य आदि का वर्णन। अग्निवेश का ससार मे प्रवृत्ति के कारण और मोक्षरूप निवृत्ति के उपाय विषयक प्रश्न। भग- वान् आत्रेय का उत्तर, मोक्ष और मुमु- क्षुभो के उदय के साधनो का वर्णन, अध्यात्म-देह की लोक से तुलना। मुक्त का लक्षण। उपसहार। षष्ठोऽध्यायः (पृ० ७८-९०) शरीरविचयः—शरीर रचना विज्ञान की प्रशसा, शरीर का लक्षण, धातु वैषम्य, वृद्धि ह्रास का कारण, औषध का उपयोग, औषध प्रयोग और स्वस्थ- वृत्त पालन का फल, धातुसाम्य। सक्षेप मे स्वस्थवृत्त। धातु के ह्रास और वृद्धि के कारण। समान गुण वाले विजातीय पदार्थों से वृद्धि। सम्पूर्ण रूपों मे शरीर- वृद्धिकारक भाव। आहार पचाने वाले पदार्थ। आहार परिपाक के परिणाम। शरीर के धातु, मल और प्रसाद-उनके गुण। गर्भ के सम्बन्ध मे ११ प्रश्न। आत्रेय पुनर्वसु का समाधान, गर्भ की अग-रचना विषय मे सूत्रकार ऋषियो के मत-गर्भाशय में बालक की स्थिति- गर्भगत बालक का जीवन। नाभि, नाड़ी और अपरा का वर्णन-जीव का बाहर आना-प्रकृति इससे विपरीत विकृति- गर्भ की वृद्धि। गर्भ के रोग। काल- मृत्यु और अकाल-मृत्यु का विवेचन, काल और अकाल निर्णय। कलि मे शतवर्ष आयु-परिमाण। उपसहार। सप्तमोऽध्यायः (पृ० ९०-९७) शरीरसंख्याशारीरम्—अवयवो की सख्या विषय मे अग्निवेश का प्रश्न, आत्रेय का प्रतिवचन, शरीर की ६ त्वचाए, शरीर के ६ अग, तीन सौ साठ हड्डिया, इन्द्रियों के पाच आश्रय, पाच कर्मेन्द्रिय, पाच ज्ञानेन्द्रिय। चेतना का स्थान। प्राण के दस आयतन। कोष्ठ के १५ अग। ५६ प्रत्यग, ९ महान् छिद्र। परमाणु भेद से शरीर के असख्य अवयव। उपसहार। अष्टमोऽध्यायः (पृ० ९७-१३५) जातिसूत्रीयम्—गुणवान् सन्तान उत्पादक कर्मों का उपदेश, रजस्वला के कर्त्तव्य। स्नानोपरान्त कर्त्तव्य। गर्भा- धान काल मे स्त्री की उचित स्थिति। गर्भाधान के अयोग्य स्त्री पुरुष। गर्भा- धान के नियम। पुत्रेष्टि। यथेष्ट सन्तान प्राप्ति के उपाय। पुसवन-विधि। गर्भ- स्थापन की विधियाँ। गर्भ-नाशक वाते, गर्भ-विकारक कारण। गर्भिणी के लिये उपचार। विशेष उपदेश। उपविष्टक- नागोदर के लक्षण। उनकी चिकित्सा। प्रसुस्रम्भ की चिकित्सा। गर्भिणी के उदावर्त्त की चिकित्सा। मृत गर्भ के लक्षण। मृत-गर्भ शल्य की बाहर करने की विधि। स्वस्थ गर्भ के पाल- नोपयोगी कर्मों का उपदेश। उस सम्ब- न्ध मे ऋषियो के मत भेद। सूतिका