भारतकोश
चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation

महर्षि चरक व दृढ़बल द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished616 पृष्ठ

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गार निर्माण । बहुपयोगी उचित सामग्री संग्रह । प्रसव-काल की प्रतीक्षा, सूतिकागार में प्रवेश । प्रसव काल के लक्षण प्रसव काल मे उपदेश आचार्यों के मत और निर्णय-गर्भ का नीचे उतारने के प्रकार । प्रबाहण का उपदेश । प्रसाविनी के कर्ण मे जपने का मन्त्र । उसके प्रसव काल मे विशेष शिक्षाए, प्रसविनी का उत्साह वर्धन । प्रसव के उपरान्त उपचार । अपरा-पातन । सद्योजात बालक के स्नान आदि कर्म । नाड़ी छेदन विधि । काटने का प्रकार, जात-कर्म संस्कार । माता को स्नेहपान, सूतिका स्त्री का स्वस्थवृत्त । प्रसूता स्त्री के प्रति विशेष उपचार । प्रसूता का दशम दिन स्नान और बालक का नामकरण । कुमार की परीक्षा । धात्री-परीक्षा । स्तन के उत्तम लक्षण । दूध के उत्तम लक्षण । दूषित दूध के लक्षण दूषित दूध वाली स्त्री के दूध के शोधनार्थ खानपान विधि । दूधवर्धक पदार्थ । धात्री की नियुक्ति । कुमारागार विधि । कुमार योग्य उचित वस्त्रादि । वस्त्रो के रोग नाशक धूम, बालक के आभूषण । बच्चों के खिलाने । शिशु को भय देने का निषेध । बालकोचित ओषधोपचार । उपसहार । इति शारीरस्थानम् ॥


इन्द्रियस्थानम्

प्रथमोऽध्यायः ( पृ० १३६-१४२ ) वर्णस्वरीयम्—रोगी के वर्ण, स्वर, गन्ध, रसादि परीक्षा । प्रकृति विकृति से पुरुष की परीक्षा । प्रकृति के छ प्रकार । तीन प्रकार की विकृति । वर्णाधिकार । स्वराधिकार । वैकृतिक स्वर, वर्ण संग्रह—मरणोन्मुख के लक्षण । उपसहार ।

द्वितीयोऽध्यायः ( पृ० १४२-१४५ ) पुष्पितकम्—गन्ध विकार पुष्प की अरिष्ट से समानता । दो प्रकार के अरिष्ट-नियत और अनियत, पुष्पित अरिष्ट के लक्षण, रस-ज्ञान अरिष्ट ।

तृतीयोऽध्यायः ( पृ० १४५-१४८) परिमर्शनीयम्—स्पर्शादिष्ट, श्वासोच्छ्वास, चक्षु, केश, लोम, शिरा, नख, मांसादि अगुंली आदि गत लक्षण ।

चतुर्थोऽध्यायः ( पृ० १४६-१५२) इन्द्रियानीकम्–इन्द्रिय गोचर अरिष्ट।

पञ्चमोऽध्यायः (पृ० १५३-१५६) पूर्वरूपीयम्—असाध्य रोगो के भिन्न भिन्न पूर्व रूप-स्वप्न लक्षणारिष्ट स्वप्न के ७ भेद ।

षष्ठोऽध्यायः ( पृ० १५६-१६३ ) कतमानिशरीरीयम्—भावी व्याधि के आश्रय स्थानो के अरिष्ट लक्षण, अनपच, प्यास, हृदयवेदना, हिचकी,