छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअजगर की चपेट में एक बहादुरगढ़ की फौलादी प्राचीरों को तोड़कर मराठी ढंग के गहने बेचने के बहाने एक सुनार किले में दाखिल हो गया। वह महाड़ पोलादपुर की ओर का रहने वाला था। वह जबान का मीठा और वार्तालाप में चतुर था। इसी कारण या किसी और कारण से उसने दुर्गाबाई को बहुत से गहने खरीदने के लिए विवश किया। वहीं बरामदे में शम्भुराजा को आते देखकर उस सुनार ने धीरे से लाखों के मूल्य की खबर सुनायी— ‘‘छोटे मालिक आप पर देवी की कृपा हो गयी है। लक्ष्मी घर आयी है। बच्ची और बच्ची की माँ दोनों श्रृंगारपुर में स्वस्थ और सुरक्षित हैं।‘‘ इस खबर को सुनकर शम्भुराजा का हृदय ममता से भर आया। उन्होंने अपने गले का हार निकालकर उस जासूस को भेंट कर दिया। अपनी पहली बच्ची के जन्म के समय मुझे श्रृंगारपुर में उपस्थित रहना चाहिए था। शम्भुराजा सोच रहे थे कि वहाँ यदि होता तो हाथी पर बैठकर जलेबियाँ बाँटता। राजकन्या की प्राप्ति की कल्पना मात्र से उनके रोंगटे खड़े हो गये। अपने महल में से—विशेष रूप से महल की पिछली खिड़की से शम्भुराजा की दृष्टि उस काले रहस्यमय घर की ओर अनेक बार जाती थी। उन्हें वहाँ बीच बीच में मियाँखान दिखाई पड़ जाते थे। अथड़ी के उस आदिलशाही सूबेदार के सम्बन्ध में पर्याप्त जानकारी शम्भुराजा को प्राप्त हो चुकी थी। मियाँखान आदिलशाही की सेवा में होते हुए भी उसकी और उसके परिवार की निष्ठा मुगल बादशाह के प्रति ही थी। मियाँखान दक्षिण की खबरें औरंगजेब तक पहुँचाने और मुगलों के हित की रक्षा करने का कार्य करता था। किन्तु मौके का लाभ उठाकर उसके शत्रुओं ने मियाँखान की शिकायत औरंगजेब से कर दी। आलमगीर स्वभाव से ही शक्की था। उसके लिए इतना मौका काफी था। उसने अथणी के लिए फौज भेजी। सिपाहियों ने मियाँखान को कैद करके बहादुरगढ़ पर खींच कर पहुँचाया। 120 :: सम्भाजी