छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 136, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंअसीम क्रोध का अन्दाजा हो गया। उन्होंने दौड़कर पीछे से शम्भूराजा को बाँहों में भर लिया। दूसरे सैनिक भी उनकी मदद के लिए दौड़ पड़े। सभी मिलकर शम्भूराजा को सँभालने का प्रयल करने लगे। तब शम्भूराजा जोर से चिल्लाये— “छोड़ो-छोड़ो, दीदीजी हमें छोड़ दो।” “क्या कर रहे हैं, युवराज?” शम्भूराजा अपना सिर पीटते हुए बोले—“रानू दीदी इस खाई में शिवाजी के पुत्र इस संभाजी के रहते हुए उस पार थोड़ी दूरी पर, सात सौ मराठों के हाथ-पैर तोड़े जाते हैं और ऐसे अमानवीय कृत्य को हम रोक नहीं पाये तो मेरे इन हाथों का क्या उपयोग है ? आप रुकिए मुझे अपने इन हाथों को ही तोड़कर प्रायश्चित करने दीजिए।” “युवराज धैर्य रखिए, अपने को सँभालिए।” दुर्गाबाई ने हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हुए कहा। शम्भूराजा ने अपनी पूरी शक्ति से जोर का धक्का दिया। परिणामस्वरूप उन्हें पकड़कर रोकने वाले सेवक बगल में जा गिरे। यह देखते ही राणूबाई दौड़कर शम्भूराजा के पैरों में गिर पड़ीं। शम्भूराजा का हाथ अपने हाथ में लेकर दहाड़ मारकर रोते हुए बोलीं, “शम्भूराजा, आज तुम अपना हाथ खो दोगे तो कल हमारा क्या होगा ? पिताजी के बाद वह दुष्ट औरंगजेब हमारे देश पर आक्रमण करेगा तो उसके घोड़े के पैर को काट देने की शक्ति तुम्हारे अतिरिक्त और किसी में है क्या?” राणूबाई की चीत्कार और व्याकुलता से शम्भूराजा के हाथ का बाटे का पत्थर नीचे गिर गया। सामने शामियाने के बीच का खम्भा था। शम्भूराजा ने उसी को बाँहों में भर लिया। जिस प्रकार भन्नाया हुआ हाथी अपने मस्तक ज्वर को शान्त करने के लिए पत्थर पर अपना माथा पटकता है, उसी तरह शम्भूराजा भी खम्भे पर अपना सिर पटकने लगे। आँखों से लगातार गिरते गर्म आँसुओं को पोंछते हुए वे बोले— “पिताजी बहुत बड़ी भूल की है मैंने, बहुत बड़ी गलती।” चार सिंह की नाक पर यदि किसी चूहे ने ज़रा-सी भी खरोंच की तो वनराज क्रोध से 134 :: सम्भाजी