छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअपने यहाँ बहुत से किलों को बनाते समय क्या किया जाता था?'' "क्या ?" "पुराने जमाने में कभी कभी किले बनाते समय उनकी दीवारें गिर जाती थीं, बुर्ज गिर जाते थे! उस निर्माण को पक्का करने के लिए नींव में नरबलि दी जाती थी। स्त्रियों और बच्चों के रक्त में चूना घोला जाता था। तो मेरे भैया आप अपनी इस बहन और लाड़ली की चिन्ता न करें। भविष्य में यदि भाग्य ने साथ दिया तो हम सब अवश्य मिलेंगे। किन्तु वैसा नहीं हो पाया तो भी चिन्ता की कोई बात नहीं। हम मर गये तो भी कोई बात नहीं लेकिन शिवाजी महाराज और संभाजी महाराज के स्वराज्य का बुर्ज हर तूफ़ान से टकराते हुए ऐसे ही खड़ा रहना चाहिए।" छह दिलेरखान की नींद अब सच में उड़ गयी थी। इतनी बड़ी फौज के सामने मराठों के युवराज के ऊपर तलवार उठाने के साहस से दिलेरखान घबरा गया था। उसी सुबह मुनासिबखान दिलेरखान से मिलने के लिए आया। उसके साथ उसका भतीजा बालेखान भी था। कुछ महीने बीजापुर की नौकरी छोड़कर अपने भतीजे के साथ दिलेरखान से आ मिला था। मुनासिब के पास अपनी पाँच हजार की फौज थी। दिलेर खान ने चिन्तित स्वर में पूछा- "मुनासिब चाचा आगे क्या हुआ?'' "खानसाहब आपके हुक्म की तामील हो गयी। संभा के प्रदेश से आये हुए दो सौ मराठे घुड़सवारों को हमने अलग कर दिया।" "बहुत अच्छा।" "उनके घोड़ों को हमने अपने क़ब्ज़े में ले लिया और उन दो सौ नामर्दों को अपने बेगारियों में सम्मिलित कर लिया।" मुनासिबखान से यह समाचार सुनकर दिलेरखान बहुत प्रसन्न हो गया। उसने बगल में रखी सुराही का शरबत गटाक से पी लिया। अपनी सफेद दाढ़ी पर हाथ फेरते हुए बोला, "संभा के खून में खूब जलवा है। कल उसका साहस देखकर मैं सम्भाजी :: 145