छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहैरान हो गया था।" "लेकिन खान साहब इस आग को कब तक सँभालना है?" "मुनासिब चाचा कल सुबह तक औरंगाबाद की पाँच हजार की फौज यहाँ पहुँच जाएगी। साथ में अपने पाँच हजार सैनिक दे देंगे फिर इस आग के अंगार को भेज देंगे औरंगजेब के पास। एक बार आलमगीर साहब के क़ब्ज़े में कोई चीज तो भभकती आग भी पानी पानी हो जाती है। औरंगजेब की इस शक्ति को सारी दुनिया जानती है।" दूसरे दिन दोपहर में फौज आगे बढ़ रही थी। दिलेरखान ने जानबूझकर संभाजी को अपनी बगल में चल रहे हाथी के हौदे में बिठाया था। वह चाहता था कि कल के झगड़े का क्रोध उनके मन से निकल जाय। कम-से कम उन्हें कैद करने के लिए बादशाह की फौज से निकला घोड़ों का दल जब तक यहाँ नहीं पहुँचता, उन्हें रोक रखना था। दिलेरखान उनके साथ मीठी मीठी बातें कर रहा था। उन्हें खुश रखने का प्रयास कर रहा था। फौज ने सामने की एक पहाड़ी पार की। हाथी घोड़े पहाड़ी उतरने लगे। शम्भूमहाराज की दृष्टि बगल की घाटी में पड़ी। वहाँ एक पानी से भरा तालाब था। उसकी बगल में एक झरना भी दिखाई पड़ा। तालाब के किनारे एक छोटा सा पत्थरो का बना पुराना शिवमन्दिर था। युवराज ने हाथी को रोकने के लिए कहा। उन्होंने हँसते हुए दिलेरखान से कहा, "खानसाहब बहुत दिन हो गये मैंने भगवान का दर्शन नहीं किया। यहाँ कुछ समय ठहरिये। मेरी इच्छा हो रही है कि स्नान करके भगवान के दर्शन कर लूँ।" दिलेरखान ने प्रसन्नतापूर्वक हँसते हुए कहा, "युवराज इस तरह विनती क्यों करते हैं? हमें भी दोपहर में आराम के लिए रुकना ही था, कीजिए आप अपनी पूजा।" दिलेरखान बहुत प्रसन्न था। उसका पक्का विश्वास था कि उसके कब्जे में रहते हुए संभाजी का यह आखिरी स्नान है। फौज वहीं रास्ते के आसपास, आगे- पीछे जहाँ भी जगह मिली आराम के लिए पसरने लगी। संभाजी राजा अपने खास सेवकों के साथ तालाब की ओर गये। पहले महादेव को प्रणाम करके फिर बगल के तालाब में उतरे। आज शम्भूमहाराज का मन बहुत प्रसन्न था। उन्होंने अपने सेवकों को भी कपड़े उतारकर पानी में प्रवेश करने के लिए विवश किया। स्वयं युवराज हाथ आगे-पीछे मारते हुए, पानी उड़ाते हुए, प्यार से जल-क्रीड़ा का आनन्द ले रहे थे। उनके पहरे वाली मुनासिबखान की फौज झरने के किनारे दोपहर का भोजन ले रही थी। किन्तु सावधानी के लिए मुनासिब ने कुछ बहादुर सैनिकों को तालाब के किनारे 146 संभाजी