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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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पर से कफन हटाया गया तो तानाजी का फूल जैसा मुरझाया चेहरा दिखाई पड़ा। शिवाजी महाराज जैसा धैर्यवान भी विह्वल हो उठा। पालकी के साथ जाने वाली दो-तीन हजार लोगों की भीड़, नदी के बाढ़ जैसा रोर-शोर करता उनका वेग, बलिदान के भाव से रोमांचित होने वाली बाँहें, जन समूह का महासागर, वेदनाबोध की तीव्रता, छिलते पाँव आदि आज भी गोदू के मन पर यथावत अंकित था। गोदू फिर उठी और दरवाजे पर आकर खड़ी हो गयी। पहले से चलती हुई मन्त्रणा अभी समाप्त नहीं हुई थी। बल्कि जाड़े के दिनों में जिस तरह अलाव को चारों और घेरकर बैठते हैं उसी प्रकार एक दूसरे से सटे हुए बैठे थे। बातें बहुत मन्द स्वर में हो रही थीं। लोग बहुत धीमी आवाज में बोल रहे थे। उनके श्वासोच्छ्वास में षड्यन्त्र की तीव्र धार चढ़ी हुई थी। गोदू का ससुर एकाएक हा-हा करके हँसा। अपनी बिल्ली जैसी आँखें गोल-गोल घुमाते हुए व्यंग्य के स्वर में बोला, "बस! सिर्फ कल दोपहर होने की देर है। कल रायगढ़ की रंगपंचमी भोसले खानदान की होली बनेगी। सवेरे नौ बजे शिवाजी महाराज की सवारी के किले के होली माल पर आने की देर है। बाघ दरवाजे पर जो तोप है उसको पलीता लगाएँगे। रंगपंचमी का रंग उड़ाएँगे और रंग की आड़ में उन्मत्त शिवाजी की भोसले को भी उड़ा देंगे।" "यदि कुछ गड़बड़ हो गयी तो?" आशंका भरे स्वर में भयभीत निवासराव ने पूछा। "बहादुरगढ़ की छावनी जाकर हमने इस षड्यन्त्र की सारी बात खान साहब से कर ली है। त्योहार देखने के बहाने बारह लड़ाकू जवान पहले ही रायगढ़ पर पहुँच चुके हैं। शिवाजी के समाप्त होने का संकेत जैसे ही तोप द्वारा दिया जाएगा, पास की झाड़ियों में छिपी यवन सेना अपनी तोपों के साथ तीव्र गति से बाहर निकल आएगी और रायगढ़ के साथ मराठों की नाक काटकर रख देगी। षड्यन्त्र की यह बात इतनी स्पष्टता से बताते हुए त्र्यम्बकराव की आँखें भयानक दिखाई दे रही थीं। त्र्यम्बकराव ने अपने दुपट्टे को प्रसन्नता से झटका। अपनी लम्बी चोटी की गाँठ बाँधी और सामने पसरे अँधेरे को विजेता की मुद्रा से देखने लगा। गोदू का गला सूख गया था। वह इस भयंकर षड्यन्त्र की कल्पना करते ही घबरा गयी। वह अपनी साँस से भी भयभीत होने लगी। इसलिए उसने अपना आँचल मुँह में भर लिया। वह तेजी से घर के पीछे के दरवाजे की ओर भागी। बाहर की तेज हवा गोदू के मस्तिष्क में भर गयी। उसके पैरों की गति तेज हो गयी। उसने तबेले में जाकर ऊपर टाँगी हुई घोड़े की काठी निकाल ली। तबेले में बँधे साठ-सत्तर घोड़ों में से पंछी नामक तेज गति वाले घोड़े को चुना। यह पंखों वाले पंछी की भाँति फर्राटे से दौड़ने वाला घोड़ा था। वह झटपट छलाँग लगाकर सम्भाजी :: 13

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