छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसहजता से हमें छिपा लेंगे। जहाँ सूर्य की किरणें तक नहीं पहुँच पातीं वहाँ इन पत्थर की दीवारों को भेद कर पापी औरंगजेब कैसे पहुँच सकेगा?'' रात को पलँग के अत्यन्त कोमल बिछौने पर भी शम्भुराजा को नींद नहीं आती थी। उनकी बेचैनी के कारण येसूबाई की चिन्ता भी बढ़ जाती थी। जब शम्भुराजा को कर्मचारियों और अधिकारियों की बात स्मरण होती तो उन्हें विषाद की जगह क्रोध आ जाता था। आवेश के स्वर में युवराज कहते, "आजकल हमारे फर्जन्द चाचा को भी जाने क्या हो गया है। जिस समय आगरा के महल से पिताजी निकले थे तब कुछ घंटों के लिए उन्होंने अपनी जगह पर फर्जन्द चाचा को सुला दिया था। क्योंकि फर्जन्द चाचा ठीक उन्हीं की तरह दिखाई देते थे। युवराज्ञी, उस समय मेरे बालमन को लगा था कि यदि ऐसा कोई प्रसंग घटित हुआ तो पिताजी की जगह को फर्जन्द चाचा भर देंगे। किन्तु आजकल तो हमें टालना ही उन्हें अच्छा लगता है।" "जाने दें! आप अधिक चिन्ता न करें। यहाँ पन्हाला पर पिताजी के साथ खुलकर बातें हुई हैं न? उनका हृदय निर्मल है तो अन्य लोगों की चिन्ता क्यों करें?'' येसूबाई ने कहा। "नहीं, येसू राज्य के कार्य व्यापार को चलाने के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति करनी पड़ती है। किन्तु अनेक बार बेड़ ही खेत खाने लगती है।" चर्चा के दौरान येसूबाई ने कहा, "जब से सोयराबाई के छोटे भाई हंबीरराव स्वराज्य के सेनापति बन गये हैं तब से हमारी सासूजी को आसमान छोटा लगने लगा है। वे तो आजकल खुलकर कहती भी हैं कि-'शेर जैसा मेरा भाई स्वराज्य का सेनापति बन गया है तो बेटा राजाराम सिंहासन तक क्यों नहीं पहुँच पाएगा?'" शम्भुराजा ने कुछ नहीं कहा। तब येसूबाई उनसे पूछने लगीं, "क्या स्वामी को यह बात सच लगती है? हंबीरराव उनकी इस प्रकार सहायता करेंगे?'' "क्यों नहीं, येसू? यदि करोड़ों की सम्पत्ति का राज्य अपने भांजे को मिल रहा हो तो कौन सा मामा ऐसा नहीं करेगा? आज नहीं तो कल हंबीर मामा अपनी बहन के पक्ष में जाएँगे ही। यह तो काले पत्थर की लकीर की तरह स्पष्ट है।" विवाह का समारोह पूरा करके लोग शीघ्र ही पन्हाला आ गये। राजाराम के प्रति असीम ममता के कारण शम्भुराजा उनकी कुशल क्षेम पूछे बिना नहीं रह सके। लोगों ने बताया कि विवाह का कार्य समाप्त होने पर बड़े महाराज को प्रतापराव की बहुत याद आयी। वे बेचैन और विचलित हो गये। कुछ लोगों ने शम्भुराजा को बताया कि विवाह के ऐन मौके पर विवाह मंडप में ही राजाराम रुष्ट हो गये। यह कहकर कि-'हमारी शादी में शम्भू दादा को क्यों नहीं बुलाया गया?' क्रोध करने लगे। वे तो विवाह वेदी पर बैठने को तैयार ही न थे। हंबीर मामा ने उन्हें किसी 170 .. सम्भाजी