छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंका छिलका उनकी नाक के पास रखा गया। बहुत देर बाद एक घायल शेर की भाँति दहाड़ते ऊँची आवाज में चिल्लाये—'पिताजी'। कवि कलश के साथ अनेक सरदार उन्हें संभालने में लगे थे। परन्तु शम्भूराजा एक भयंकर तूफान की तरह उठ खड़े हुए। अपनी सशक्त भुजाओं से सभी को ढकेलते हुए उन्होंने छलाँग लगाई। दोनों भुजाओं में न समाने वाले मोटे गोलाकार पत्थर को पकड़कर उस पर अपना सिर धुनते हुए वे करुण चीत्कार करने लगे—'पिताजीऽऽ, पिताजीऽऽ।' ऐसा लगा कि वह पत्थर का खम्भा न होकर पंढरपर के पांडुरंग ही खम्भे के रूप में अवतरित हो गये हों और शम्भूमहाराज उनके कन्धे पर सिर रखकर रुदन कर रहे हों। यह दृश्य सभी को मर्माहत कर गया। बहुत देर बाद युवराज कुछ शान्त हुए। उन्हें जलपात्र से पानी पिलाया गया। भावना का पहला ज्वार उतर गया। जासूस रायगढ़ का समाचार बता रहे थे। वह बता रहा था कि रायगढ़ की नाकाबन्दी किस प्रकार की गयी थी। नाकाबन्दी के कारण आसपास की जनता किस प्रकार बेचैन हो उठी थी, हनुमान जयन्ती के दिन दोपहर के समय किस प्रकार महाराज सबको छोड़कर चल बसे। जासूस की बातें सुनकर आसपास एकत्र लोग विलाप करने लगे। "और राजा साहब की उत्तर क्रिया किसने की?" कवि कलश की आवाज गूँजी। इस धारदार प्रश्न को सुनकर संभाजी महाराज ने भी जासूसों की ओर घूमकर देखा। "काल हौद के समीप कुछ लोग एकत्र हुए थे। वहीं पर चन्दनकाष्ठ और बेलकाष्ठ से मन्त्राग्नि दी गयी।" "परन्तु अन्तिम क्रिया किसके हाथों की गयी?" "राजाराम के हाथों सम्पन्न हुई। उनके साथ सिगणापुरवासी साबाजी भोसले को बिठाया गया था। उन्हीं की सहायता से राजारामसाहब ने सारी क्रिया पूरी की।" "क्या आपके शास्त्री पंडित और उद्दंड कर्मचारी इस बात को भूल गये कि पिता की उत्तर क्रिया का अधिकार शास्त्रों ने केवल ज्येष्ठपुत्र को दिया है?" शम्भूराजा ने प्रश्न किया। भगवान के गले की मोतियों की माला के धागे के जीर्ण हो जाने के कारण टूट जाने से जिस प्रकार एक-एक मोती गिरने लगता है उसी प्रकार शम्भूराजा की आँखों से अश्रुपात होने लगा। किन्तु दूसरी ओर इस अन्याय के विरोध में उनका मन विद्रोह कर रहा था। उन्होंने प्रश्न किया— "अन्तिम संस्कार का यह निर्णय हमारी उपेक्षा करके राज्यकर्मचारियों और माताजी ने कैसे लिया? क्या शिवाजी महाराज का बेटा शम्भू जीवित नहीं था? या सम्भाजी :: 185