छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअवस्था में शम्भूराजा के सामने खड़े हो गये। कई लोग एक साथ ही जोर जोर से कहने लगे, "महाराज? गजब हो गया, फर्जन्द भाग गये, फर्जद भाग गये।" "कौन फर्जन्द?" शम्भूराजा ने अवाक होकर मामने देखा। "हिरोजी बाबा फर्जन्द।" सिपाही कहने लगे। "अरे लेकिन उन्हें हमने कहाँ बन्दी खाने में डाल रखा था?" "भाग गये याने खजाना लेकर भाग गये। कोंकण की दिशा में भागे हैं।" संभाजी राजा बड़े असमंजस में पड़ गये—"क्या कह रहे हो?" "हाँ सरकार। रत्नों से भरे दो बड़े बड़े पिटारे लेकर वे भाग गये। उनके साथ पन्द्रह-बीस लोग और भी हैं।" हिरोजी के समान अनुभवी और जानकार व्यक्ति की दगाबाजी से हंबीरराव भी सम्भ्रमित हो गये थे। उन्होंने शम्भूराजा मे कहा, "फर्जन्द का पीछा शीघ्रता से करना चाहिए। सेना की एक टुकड़ी को उनकी खबर लेने भेजता हूँ।" "भेज दीजिए। ऐसे भागकर कितनी दूर भागे होंगे।" शम्भूराजा ने बड़े शान्त भाव से कहा। हंबीर मामा कुछ महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने होंगे। देर रात तक विचार विमर्श के लिए बैठना होगा। "जैसी आपकी मर्जी, महाराज!" रात में विचार-विमर्श आरम्भ हुआ। महालोजी घोडपड़े, हंबीरराव कृष्णाजी कंक, और प्रह्लाद निराजी बैठक में उपस्थित थे। शम्भूराजा की बगल में येसूबाई भी बैठी थीं। सभी की ओर देखते हुए शम्भूराजा ने कहा, "आज के हमारे उत्साह में हिरोजी काका ने कलंक लगा दिया। किन्तु उसकी चिन्ता करने की आवश्यकता नहीं है। जहाँ घर होगा वहाँ दो-चार चूहे तो घुसे ही होंगे। समय-समय पर उन्हें कुचलना होगा। परन्तु भविष्य में इस भूमि पर पापी औरंगजेब दौड़कर आएगा। उसके साथ मोर्चे की उचित तैयारी सेना की पुनर्रचना, पूरी तैयारी अभी से करनी होगी। पिताजी ने तीन चार महीने पहले हमें इस धोखे की याद दिलाई थी। दुनिया के तीन चार महाबलशाली राजाओं में औरंगजेब की गणना है। कहते हैं कि उसका एक एक सूबा हमारे स्वराज्य का दुगुना-चौगुना है।" "क्या कह रहे हैं?" प्रह्लाद निराजी ने आश्चर्य से पूछा। "हाँ प्रह्लाद पंत! किसी नदी की उमड़ती बाढ़ की तरह औरंगजेब की फौज हमारे राज्य की ओर आ रही है। ऐसा आभास मुझे हो रहा है। बड़े महाराज का स्वराज्य अगर बचाना है तो हर एक किले पर गोला बारूद और धनधान्य की पूरी तैयारी रखनी चाहिए।" "ठीक है महाराज! हम एक बार रायगढ़ पहुँच गये तो सबसे पहले यही काम हाथ में लेंगे।" प्रह्लाद ने गर्दन हिलाकर कहा। सम्भाजी :: 197