छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें“हम राजा शिर्के हैं। हमें कुछ नहीं चाहिए। पीढ़ी-दर-पीढ़ी से चली आ रही दाभोल की हमारी जागीर हमें दिला दीजिए।” येसूबाई अधीर हो गयीं। अपने बड़े भाई की कटूक्ति में किसी गम्भीर प्रकरण का आभास उनकी तीक्षण बुद्धि ने कर लिया। तब उन्होंने कहा, “राजमहल में कुछ काम धाम चल रहा है। महाराज अभी तक रायगढ़ नहीं पहुँचे हैं। अभी तक उन्होंने राज्य का सूत्र अपने हाथ में नहीं लिया है। थोड़ा धैर्य मे काम लेना है। फिर भी मैं महाराज से कह कर देखूँगी।” दो दिन बीत गये। शिर्के राजमहल में ही बने रहे। तीसरे दिन उन्होंने येसूबाई को फिर टोका—“‘येसू, तुम्हारे मायके की दाभोल वाली जागीर का क्या हुआ?” “हाँ भाई साहब, मैंने महाराज से कहा है। उन्होंने कुछ समय रुकने के लिए कहा।” “येसू, भोसले घराने की बहू बनकर राजा शिर्के के मूर्य कुल के खून को भूल गयी हो क्या?” “परन्तु भाई माहब मैं कहती हूँ कि इस समय इतना हठ करना उचित होगा। क्या?” “इसमें हमारा कोई अपराध नहीं है। तुम्हारे ससुर शिवाजी ने हम शिर्के लोगों पर अत्याचार किया है। परम्परा से चली आ रही दाभोल की हमारी जागीर को जबरदस्ती हड़प लिया।” दाँत चबाते हुए गणोजी ने कहा। “भाई साहब शिवाजी महाराज को क्यों दोष दे रहे हो? यह भूल गये क्या कि आप भी उन्हीं शिवाजी महाराज के दामाद हो?” “बड़ा छँटा हुआ आदमी था तुम्हारा ससुर। डाँट-डपट कर दहशत से हमारी जागीर दबोच ली। ऊपर शहद की उँगली चटाते हुए कहा कि जब गणोजी राव को पुत्ररत्न प्राप्त होगा तो जागीर वापस कर देंगे। वाह रे-वाह!” “देख येसू, दाभोल की जागीर से भोसले लोगों का कोई सम्बन्ध नहीं है। उसे बीजापुर के आदिलशाह ने हमें ईनामस्वरूप दिया था। हम तुमसे भीख नहीं, अपना हक माँग रहे हैं।” जब गणोजी शिर्के ने बहुत आफत मचाई और बड़े भाई के अधिकार से येसूबाई की नाक में दम कर दिया। तब येसूबाई ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “जागीर जैसे नाजुक मामले में हम इस तरह उतावली में कैसे निर्णय ले सकते हैं? आप चाहें तो स्वयं महाराज से मिल लें।” गणोजी रूठ गये। तुरन्त जाने के लिए उठ खड़े हुए। विदा देते समय येसूबाई ने झुक कर उन्हें प्रणाम किया। उन्होंने कहा, “भाई साहब इस छोटी-सी बात को मन में न लाएँ, क्रोध न करें। आपकी समस्या का समाधान अवश्य निकलेगा। और सम्भाजी :: 201