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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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समाप्त होते ही शम्भूराजा ने कहा, "कुछ दिन पहले मैंने एक निर्णय लिया था। बालाजी पन्त, अण्णाजी और हिरोजी के घर से चौकी पहरे उठा लिए थे। भाइयो, मैं बड़े महाराज के समय के इन अनुभवी पुराने लोगों पर नयी जिम्मेदारियाँ सौंपने वाला हूँ।" राजा के इन उद्गारों को सुनकर दरबार में शहनाई आदि मंगल वाद्य बजने लगे। बुजुर्गों को सम्मानित करने के उपलक्ष्य में राजा की बड़ी प्रशंसा की। इसी समय बाई ओर झिलमिलाते पर्दे की आड़ से पहले बालाजी पन्त उनके बाद अण्णाजी दत्तो हिरोजी, राहुजी जैसे कर्मचारी आकर सभा मंडप में खड़े हो गये। उनके सिर की कलीदार पगड़ियां, पट्टे, महँगे कपड़े गले में पड़े रत्नहार सब कुछ बहुत शानदार लग रहे थे। उन सभी ने आकर पहले शम्भूराजा का और दरबार का अभिवादन किया। दरबार में उपस्थित प्रजावर्ग ने जोर से जय घोष किया। शम्भूराजा ने सन्तोष व्यक्त करते हुए कहा, "महानुभावो! भ्रमों और गलतफहमियों का गन्दा पानी बह गया है। मेरे मन में कोई भी शंका या द्वेष नहीं है। बताइए राज्य का चिटणीस पद हम किसे सौंपें?" दरबार के लोग चुप्पी साध गये। तब शम्भूराजा ने हँसकर स्वयं कहा, "एक निष्ठा और सेवा भाव का ही दूसरा नाम बालाजी पन्त है। क्या उन्हें छोड़कर दूसरा कोई चिटणीस हो सकता है?" शम्भूराजा के भावपूर्ण शब्दों से सभी के मन भर आए। सम्मान का वस्त्र देने के लिए उन्होंने चिटणीस को पास बुलाया। इसी समय कल्याण और भिभंडी के सूबों की जिम्मेदारी मोरोपन्त को सौंपने की घोषणा की। पास में खड़े हंबीरराव मोहिते की ओर शम्भूमहाराज ने बड़े गर्व से देखा। उन्होंने कहा, "ऐसा कहा जाता है कि वीरों का पोवाड़ा वीरों को ही गाना चाहिए। उसी न्याय से वीरों के शस्त्र महावीर ही चलाया करते हैं। प्रतापराव गूजर के स्वर्गवासी होने के बाद मामाजी ने ही साहसपूर्वक फौलादी शस्त्र सँभाला है। इसके बाद सेनापति का पदभार हंबीरराव मामा ही सँभालेंगे।" हंबीरराव के बाद प्रहलाद निराजी को न्यायाधीश के वस्त्र मिले। इसी प्रकार मोरोपन्त पंडित दानाध्यक्ष, आबाजी सोनदेव सुरनवीस और दाजी पन्त वाकेनवीस बने। काफी समय से कोने में खड़े भारी डीलडौल के अण्णाजी दत्तो परेशान से दिख रहे थे, उनके माथे पर घर्म बिन्दु एकत्र हो गये थे। उनकी दृष्टि स्थिर नहीं थी। उनका चित्त अशान्त था। अण्णाजी की शान्त किन्तु तीखी दृष्टि डालते हुए शम्भूराजा ने कहा, "पन्त इस नयी राज्य व्यवस्था में भी आपका स्थान सम्मानजनक ही होगा। हम बड़ी प्रसन्नता से स्वराज्य के मजूमदार पद पर आपकी नियुक्ति करते सम्भाजी :: 233