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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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करके कैसे आगे जा सकते हैं?" "महाराज, हमारी सुनें, विलम्ब हो जाएगा। हमारा पीछा किया जाये, इसकी भी सम्भावना है। देवी के दर्शन के लिए फिर आ जाएँगे।" रूपाजी कहने लगे। "नहीं ऽ! अभी जाएँगे।" "परन्तु महाराज यह सामने की चढ़ाई चढ़ते-उतरते सारी रात बीत जाएगी।" मानाजी ने विनयपूर्वक कहा। "होने दीजिए, अच्छे यश और आशीर्वाद के लिए कष्टकर मार्ग ही अपनाना पड़ता है।" शम्भूराजा ने दृढ़ता से कहा। लूट का सामान लेकर जाने वाली सेना कवि कलश के साथ आगे बढ़ गयी। केवल डेढ़ हजार घुड़सवार लेकर, रात में ही शम्भूराजा ऊपर गये। भोर होने लगी थी। उस सोये जंगल में सप्तशृंगी का एक गश्ती मराठा दल जाग रहा था। हो सकता है कि श्रद्धालु, शम्भूराजा लौटते समय पीछे के रास्ते से वहाँ आएँ, इसलिए वहाँ का थानेदार भी जाग रहा था। सामने की घाटी की दूसरी ओर मार्कंडा किले की बुर्जों पर पहरेदार भी जाग रहे थे। सप्तशृंगी माता का छोटा-सा मन्दिर पहाड़ी के कन्धों पर खड़ा था। नीचे थोड़ी समतल भूमि पर पुजारियों के घर थे। वहीं से आने वाली रोशनी के उजाले में महाराज चढ़ाई करने लगे। रास्ता सँकरा, खड़ा और दोनों ओर से करौंदे की घनी झाड़ियों से घिरा था। उस सँकरे रास्ते से एक-एक व्यक्ति ही चल सकते थे। नीचे घोड़े से उतरकर शम्भू महाराज तेजी से चढ़ाई चढ़ने लगे। पहाड़ी के मध्य भाग में महामाया सप्तशृंगी का वह छोटा-सा मन्दिर था। मन्दिर के सामने दो-तीन सोमजुही के पेड़ थे। महाराज देवी दर्शन के लिए आने वाले हैं, यह खबर भिखारियों और वनवासी गरीबों को लग चुकी थी। वे मन्दिर के बाहर सँकरी जमीन में इकट्ठे हो गये थे। उनके साथ चार-पाँच फकीर भी हाथ में कटोरे लेकर बैठे थे। दर्शन के लिए भीतर जाने से पहले राजा वहाँ रुके। खंडो बल्लाल के हाथ में मुहरों की थैली थी। उसमें हाथ डालकर महाराज गरीबों की थालियों और फकीरों के कटोरों में मुट्ठी-मुट्ठी भर मुहरें डालने लगे। फकीरों के वेश में बैठे पठानों ने अपने नीचे छुपाई हुई तलवारें खींच लीं। वे 'मारोऽ मारोऽऽ' कहते हुए शम्भू महाराज पर टूट पड़े। शम्भू महाराज ने भी अपनी कमर से तलवार खींच ली और क्रोध से आगे बढ़े। एक साथ पाँच लोग महाराज पर आक्रमण कर रहे थे। महाराज अपनी तलवार को तेज चलाते हुए अपना बचाव कर रहे थे। राजा के कन्धों पर तलवार का वार पड़ा। वस्त्र फट गया और 'खन्न' की आवाज हुई। शम्भू महाराज ने जालीदार कवच पहनने में प्रमाद नहीं किया था। वह कवच और लौह शिरस्त्राण उनकी सहायता कर रहे थे। जैसे कोई भूखा शेर अयाल फैलाकर 252 :: सम्भाजी