छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 262, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंउन्होंने पूछा- "कविराज, यह पत्र किसकी ओर से आया है?" "शहजादा अकबर।" "यह बादशाह का सचमुच का बेटा है या कोई नकली?" महाराज ने चिन्तित स्वर में पूछा। "राजन, मैंने जासूसों से इस बात की पुष्टि करवा ली है। दिलरस बानू नामक बेगम से पैदा हुआ है यह लड़का। कहते हैं कि यह बादशाह का बड़ा लाड़ला शहजादा था।" "इसने ही क्या पिछले दिनों राजपूताना में औरंगजेब के साथ बगावत की थी? राजपूतों की कुछ सेनाएँ उसके साथ मिल गयी थीं? उन्हीं को लेकर इसने अपने को हिन्दुस्तान का बादशाह घोषित कर दिया।" "हाँ राजन, वही बगावत करने वाला शहजादा।" "ऐसा है! लेकिन सारा हिन्दुस्तान छोड़कर वह दक्षिण में हमारे पास ही क्यों आना चाहता है? इस शहजादे के हमारे पास आने का उद्देश्य ठीक ठीक पता लगाकर हमें खबर कीजिए।" राजा ने दरबार में इस सन्दर्भ की सभी को सूचना दी। किन्तु पहले पत्र के बाद 'मान न मान मैं तेरा मेहमान' की शैली में शहजादा अकबर दक्षिण की ओर चल पड़ा। पन्द्रह बीस दिन होते-होते शहजादे की ओर से दूसरा पत्र महाराज को प्राप्त हुआ। पत्र में शहजादा बहुत उतावला दिखाई पड़ रहा था। लगता था उसे शम्भुराज के पास आने और उनकी सहायता लेने की बड़ी उत्सुकता थी। किन्तु दूसरा पत्र पढ़ते हुए भी शम्भु महाराज के चेहरे की लकीरें हिली नहीं। यह देखकर कवि कलश अपनी घनी भौंहों को तानकर बोले-"राजन, शहजादे के पहले पत्र का भी उत्तर अभी तक गया नहीं। इतनी उदासीनता भी अच्छी नहीं?" "देखिए कविराज, इस अकबर के बारे में और क्या क्या सूचनाएँ मिलीं, पहले वह बताइए।" महाराज के इस प्रश्न के साथ ही कविराज कुछ हिचके, परन्तु तुरन्त स्वयं को संभालते हुए बोले, "अपने लाडले की बगावत से औरंगजेब बहुत दुखी हो गया है। लेकिन मराठों जैसे अपने कट्टर दुश्मन से अकबर के मिलने के समाचार से बादशाह बहुत घबरा गया है। उसे डर है कि कहीं मराठों के साथ उसके अन्य शत्रु भी अकबर के साथ न मिल जाएँ। इस कल्पना से उसका धैर्य छूट गया है। शहजादे को दक्षिण जाने से रोकने के लिए जी तोड़ मुहिम चलाई है। सेना की अनेक टुकड़ियाँ भेजकर रास्ते की नदियों, पहाड़ी घाटियों, सरायों आदि पर पहरे बिठा दिये हैं। अपने बाप की व्यवस्था को चकमा देने के लिए शहजादा पागलों की भाँति भाग रहा है। वह आपसे मिलने के लिए व्याकुल है।" 260 :: सम्भाजी