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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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हो और उस पर हँस भी रहे हो? तब भी पिताजी की दाढ़ी-मूँछों मे हँसी गायब नहीं हुई। वे बोले—माताजी! उन तेइस किलों के बदले में मुगलों की ओर से जयसिंह ने हमें जंजीरा देना स्वीकार कर लिया है। " " 'क्या कह रहे हैं महाराज ? जंजीरा तभी मिल गया था ? " येसूबाई ने बीच में ही उत्सुकता से पूछा। वह हम मराठों को मिले इसके लिए जयसिंह ने बादशाह से सिफारिश की थी— "जहाँपनाह ! तेईस बलशाली किलों के बदले में जंजीरा छोड़ दें ऐसा शिवाजी का बालहठ है। जाने दें। पानी का एक सामान्य किला छोड़ दिया तो क्या बिगड़ जाएगा ?" " उस पर औरंगजेब ने क्या जवाब दिया ?" येसूबाई ने पूछा। "वह भी बहुत महत्त्वपूर्ण है।" शम्भूराजा बताने लगे, "औरंगजेब ने मिर्जा राजा को लिखा—मिर्जा राजा आप पागल हैं। जंजीरा सिद्दी के लिए ही नहीं हमारे लिए भी कलेजे का टुकड़ा है। तुम्हारे इस दान से उस शिवा का, जंगली चूहे का मगरमच्छ में रूपान्तरण हो जाएगा और फिर उसकी पूँछ के धक्के से दिल्ली का सिंहासन भी डगमगा जाएगा।" वे बीती बातें सुनकर येसूबाई अवाक रह गयीं। उन्होंने धीरे से पूछा— "महाराज, क्या जंजीरा सचमुच इतना जुल्मी है ?" "आज हमें जंजीरा न जीत पाने का इतना दुख नहीं है। किन्तु उस नर वीर कोंडीबाबा को गँवा देने का हमें बड़ा दुख है। उनके उधर चले जाने से जंजीरे के सिद्दी की ताकत दुगुनी हो गयी।" पाँच "अल्लाहताला की मेहरबानी से दिल्ली का तख्त मुझे मिला तो नाम मेरा रहेगा और शासन केवल संभाजी महाराज करेंगे। बादशाह मेरे वालिद हैं तो भी आपके और मेरे सबसे बड़े दुश्मन हैं। इसे ध्यान में रखें। इसलिए हम दोनों के दुश्मन का खात्मा करने के लिए हम दोनों एक हो जाएँ।" आँखों के आगे का पत्र पढ़ते-पढ़ते कविराज बीच में ही रुक गये। उन्होंने महाराज की ओर चौंककर देखा। शम्भूमहाराज विचारमग्न दिखे। मुस्कराते हुए सम्भाजी :: 259