छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 270, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंअवधि में मगरूर मोरोदादा अस्तित्वहीन हो गये। मोरोदादा के पदच्युत होने के समाचार को रायगढ़ पहुँचने में चार दिन लग गये। इस समाचार से अष्टप्रधानों की नींद उड़ गयी। इस बात की किसी को भी कोई सूचना नहीं थी कि मोरोदादा को पदच्युत करने के लिए महाराज के हस्ताक्षर और मुद्रा के साथ कोई फरमान निकाला गया था और गोवा की ओर भेजा गया था। अष्टप्रधान पूरी तरह भौचक्के हो गये थे। इस प्रकरण से अण्णाजी दत्तो को गहरा धक्का लगा। कुछ दिनों तक तो उन्हें अन्न-पानी की भी सुधि न रही। उन्हें अविराम गति से कँपकँपी छूट रही थी। वे बालाजी चिटणीस से गम्भीर स्वर में कहने लगे—"चिटणीस, मैं श्री गजानन की शपथ लेकर कहता हूँ कि अब इसके आगे ऐसा ही होता रहेगा। अपराध की न जाँच-पड़ताल न कोई सबूत, यह तो ऐसा ही हुआ कि जो पसन्द नहीं है उसकी गर्दन पर बेरहमी से आरी चला दो।" अण्णाजी को समझाते हुए चिटणीस ने कहा, "जाने दीजिए अण्णाजी! एक सामान्य सूबेदार के पदच्युत होने से आप इतना दुखी क्यों हो रहे हो? सहयोगियों की राय के बिना भी राजा स्वतन्त्र निर्णय लेने का अधिकारी होता है।" "बालाजी यह इतना सरल नहीं है? इसके मूल में एक षड्यन्त्रकारी राजनीति है। जानबूझकर मेरे आदमियों को चुन चुनकर उनके साथ धोखा किया जा रहा है। शिवाजी महाराज के समय के सभी कर्मचारी नालायक हैं, यही सिद्ध करने के लिए ये सारे षड्यन्त्र रचे जा रहे हैं।" "परन्तु इसमें वास्तविक दोषी कौन है?" "किसको दोष दिया जाये, चिटणीस? अरे भाई, उस कलुषा ने राजा को अपने क़ब्ज़े में कर लिया है। उस लम्पट के कारण हमारा धर्म, हमारी संस्कृति, सब कुछ खतरे में पड़ गया है।" इन दिनों हिरोजी फर्जन्द और प्रधानों के बीच उठना-बैठना बहुत बढ़ गया था। राज्य अनेक जिम्मेदारी वाले कार्य महाराज ने हिरोजी को सौंपे थे, किन्तु हिरोजी कुछ असन्तुष्ट दिखाई पड़ते थे। वे अपनी जिम्मेदारियों पर ध्यान नहीं दे रहे थे। उनकी ये शिकायतें राजा के पास आ रही थीं। एक दिन हिरोजी फर्जन्द शम्भू महाराज से मिलने दरबार में आए। दोपहर का समय था। इसकी सूचना मिलते ही शम्भूमहाराज ने उन्हें अन्दर बुला लिया। पैंसठ वर्ष के ऊँचे कद और उत्तम स्वास्थ्य वाले हिरोजी फर्जन्द ने आते ही कहा, "शम्भूराजा कुछ हमारी सलाह भी सुन लिया करें। मौके का लाभ उठाइए। औरंगजेब का वह छोकरा आपको पत्र पर पत्र भेज रहा है, किन्तु आपने उसकी ओर मुड़कर भी नहीं देखा।" 268 :: सम्भाजी