छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमहाराज ने हँसकर कहा, "मेरी नींद हराम करके आप खुद कहाँ चले?" "महाराज?" "झोंपड़ी हो या महल! एक बार चूहों ने सुराख कर दी और खोदना शुरू कर दिया तो सुख की नींद कैसे आ सकती है? अब जल्दी से एक काम कीजिए। अभी के अभी मोरोदादा को पदच्युत करने का आदेश निकालिए। उस फरमान की तामील के लिए आज ही मध्यरात्रि के पूर्व पाचाड़ से डिचोली की ओर घोड़े दौड़ जाने चाहिए।" "राजन! आपकी आज्ञा का पालन मैं अवश्य करूँगा। किन्तु इस फरमान पर अपने पेशवों और सुरनवीम की स्वीकृति आवश्यक है।" "ऐसा क्या कह रहे हैं कविराज? आप छंदोगामात्य अर्थात् सर्वाधिकार सम्पन्न पद पर नियुक्त किए गये हैं। इस प्रकार का कोई भी आदेश जारी करने के लिए यदि अष्टप्रधान उपलब्ध नहीं हैं, तो ऐसी स्थिति में नियमानुसार आपको सारे अधिकार प्राप्त हो जाते हैं।" महाराज, आप मुझ पर पहाड़ जैसा विश्वास रखते हैं, इसके लिए लिए मैं सदैव ही आपके प्रति कृतज्ञ रहूँगा। किन्तु यह न भूलें कि यह प्रशासन है। हम इस प्रकार का आचरण कैसे कर सकते हैं?" कवि कलश ने चिन्तित स्वर में कहा, "राजन प्रशासन चलाने में उसकी सीढ़ियों को ठोकर मारने से नहीं चलता। अधिकारियों और प्रधानों की राय का ध्यान रखना पड़ता है।" "छोड़ो भी कविराज, इन फिजूल की बातों को। प्रशासन चलाते हुए जब तक मैंने अपने हृदय में प्रजा का मंगलकुम्भ सँभाल कर रखा है, तब तक किसी की चिन्ता करने का कोई कारण नहीं है। बता दीजिए उस प्रधान को कि प्रशासन के कागजी घोड़े आपके मनोरंजन के नहीं, हमारे स्वप्नों को पूरा करने के लिए नचाए जाते हैं। किसी भी परिणाम के लिए राजा के रूप में हम स्वयं भी उत्तरदायी होते हैं। कविराज, संसार में जब जब क्रान्ति होती है, राजा की गद्दी डगमगाती है। तब सिर राजा का ही काटा जाता है, कर्मचारियों का नहीं।" सात पदच्युत होने का फरमान मोरोदादा को डिचोली में दिया गया। उसी दिन उनके निवास का महल जब्त कर लिया गया। रामजी ठाकुर ने वहाँ के कागजात, मुद्राएँ और गोदामों की चाभियाँ आदि सब कुछ अपने कब्जे में ले लिया। घंटे भर की सम्भाजी : 267