छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचिटणीस घबराकर बोले— "आपकी आज्ञा सिर आँखों पर, रानी साहब।" "देख लीजिए चिटणीस। आप और शम्भुराजा में बहुत मेल है। आपके बच्चे उन्हीं के महल में पड़े रहते हैं। वह येसू आपके खंडो और निलो को अपने पुत्र की तरह मानती हैं।" "पर रानी साहब पहले का समय अब नहीं रहा।" राहुजी सोमनाथ बीच में ही बोल पडे— "वह कैसे?" "महाड का वह हरामजादा दादजी रघुनाथ देशपांडे पन्हाला में जाकर बैठा है। उसे शम्भुराजा से चिटणीस पद चाहिए।" "क्या करते हो? बालाजी को निकालकर?" सोयराबाई ने कहा। "जी हाँ। दादजी कलश का मित्र है।" राहुजी ने कहा। पहले तो पिता पुत्र लोगों की गहरी नजर से दब गये थे। उसमें अब एक और जानकारी मिल रही थी। इस प्रकार बहाना करके उन्होने अपना पक्ष रख दिया। परन्तु सोयराबाई को उन पर भरोसा नहीं था। बालाजी ने पुनः कहा, "पन्हाला मे महाराज को कैद करने का पत्र हमारे आवजी ने लिखा था। तभी से हम उनके कोप भाजन बन गये। आपकी सूचना सही हमारा यह चिटणीस पद कितने दिन टिकेगा? भगवान ही जाने।" बालाजी चिटणीस आँखे फाडकर देखने लगे। उन्होंने लम्बी साँस लेकर कहा, "शम्भुराजा के साथ हमारी मैत्री हमारा भूतकाल है। पर आजकल राजा का बर्ताव कुछ ठीक नहीं है। उनकी अपेक्षा हमारे रायराम साहब ही क्या बुरे हैं?" सोयराबाई और अण्णाजी दत्तों के साथ सभी लोग चिटणीस की ओर प्रसन्नता से देखा। ग्यारह पन्हालगढ़ की हवा बडी आनन्ददायक थी किन्तु उतनी ही भयानक भी। सवेरे सवेरे कवि कलश ने शम्भूराजा का अभिवादन किया। राजा ने मुड़कर कवि कलश की ओर देखा। उनकी मुद्रा बहुत डरावनी लग रही थी। उनके चेहरे पर स्पष्ट दिख रही थी कि कोई न कोई भयानक घटना अवश्य घटी है। सम्भाजी 283