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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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दासी भी आगे को भागने लगे। शम्भूराजा की उग्र मुद्रा को देखने का साहस किसी में भी नहीं था। सेवकों को एक उपाय सूझा। राजा के दरवाजे पर पहुँचने के पहले ही उन्होंने दरवाजा भीतर से बन्द कर लिया। शम्भूराजा महल के दरवाजे पर पहुँचे। दरवाजे को बन्द देखकर उनकी मुट्ठियाँ बँध गयीं। वे ओठों और दाँतों को पीसते हुए बन्द दरवाजे को देखने लगे। शम्भूराजा एक आदमी की जगह जलती हुई भट्टी बन गये थे। दरवाजे की ओर देखकर शम्भूराजा जोर से दहाड़े-‘‘माताजी, दरवाजा बन्द कर लेने से पाप नहीं छुप सकता। मैंने जब पहली बार नजरबन्द किया था, तभी कह दिया था कि यहाँ आप दया की पात्र शरणार्थी की तरह नहीं माता के अधिकार से रहिए। परन्तु माताजी आपने तो हद ही कर दी। आपने तो राजमाता के स्थान पर एक कपटी, स्वार्थी और दुष्ट स्त्री का रूप धारण कर लिया। माताजीऽऽ अब छुपकर क्यों बैठी हो? दरवाजा खोलिएऽऽ....?’’ शम्भूराजा के शरीर से ज्वालाएँ फूट रही थीं। उनके रौद्र रूप के सामने जाने की हिम्मत किसी में भी नहीं थी। अपनी आँखों से जलते अंगारे फेंकते हुए शम्भूराजा ने कहा, ‘‘माताजी आप के काले कारनामे ऐसे हैं कि कैकेयी भी उनके आगे हारकर सिर झुका ले। राज्य का उत्तराधिकारी होने पर भी आप मेरी गिरफ्तारी का आदेश भेजती हैं? एक बार नहीं बार-बार मेरा प्राण लेने का प्रयत्न कर रही हैं, आप। अजी, कहाँ माताजी पुतलीबाई थीं जो शिवाजी महाराज के जूते अपने सीने से लगाकर अग्नि में कूद गयीं, सती हो गयीं, अमर हो गयीं और आप हैं कि शिवाजी महाराज का स्वराज्य अपने स्वार्थ के लिए उस औरंगजेब के लड़के की झोली में डालने निकली थीं। अरे आप हमारी माता हैं? आप तो सचमुच पूतना मौसी हैं!!....’’ महल की दूसरी ओर लोगों की भीड़ जमा हो गयी थी। आगे बढ़ने की हिम्मत किसी में भी नहीं थी। उसी समय महारानी येसूबाई भीड़ से निकलकर सामने आ पहुँचीं। उन्होंने क्रोध से उबलते शम्भूराजा का हाथ पकड़ा और कठोर शब्दों में कहा, ‘‘स्वामी, आप राजा हैं, राजा की तरह व्यवहार कीजिए।’’ शम्भूराजा ने येसूबाई का हाथ झटक दिया। अपना हाथ उठाकर वे गरज पड़े-‘‘हमारी राजमाता डाइन की तरह व्यवहार करे? हमारे अष्ट प्रधान दुश्मन के सामने नमाज पढ़ें और हमारे गले पर छुरी रखें?’’ ‘‘महाराज कृपा कीजिए। क्रोध पर काबू पाइए।’’ ‘‘येसूबाई आप मेरे क्रोध का क्या लेकर बैठी हैं? यह अपने राजाराम की माता हैं इसलिए.... नहीं तो इन्हें कब का दीवार में चुनवाकर मार डाला होता।’’ शम्भूराजा के भयंकर क्रोध के आगे येसूबाई हार गयीं। उनकी आँखें भर 300 :: सम्भाजी