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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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जाते हैं और चिल्लाने लगते हैं।" कवि कलश बड़ी नाराजी के साथ बताने लगे- "महारानी जी वह प्रसंग घटित न हो, इसके लिए मैंने भी बहुत प्रयास किया था। महाराज को भी कोई जानकारी नहीं थी। परन्तु दरबार के हमारे शत्रुओं ने हमें नष्ट करने का प्रयास बार- बार किया। सभी ने यही आरोप लगाया कि कवि कलश के कहने से ही राजा ने चिटणीस को मृत्यु दंड दिया। चिटणीस की हत्या के लिए हर तरह से मैं जिम्मेदार ठहराया गया। मैं ही जीवन भर के लिए बदनाम किया गया।" आँखों में उमड़े आँसू को सँभालते हुए कवि कलश आगे बढ़े और येसूबाई का पैर पकड़कर बोले, "दया कीजिए महारानी जी। हमें जाने की आज्ञा दीजिए।" "कविराज, आपके इस प्रकार अचानक चले जाने में राजा की ही हानि है। विरोधियों का क्या जाता है? कविराज, सच्चाई तो यह है कि हमें ही आपकी अत्यन्त आवश्यकता है। हम इस बात को हृदय से स्वीकार करते हैं। आप जानते हैं कि शम्भूराजा नाम के इस जलते तूफान को आँचल में बाँधकर जीवन चलाना कितना कठिन है?" "परन्तु....?" "अब जाने दीजिए। मन में आने वाले उल्टे-सीधे विचारों को निकाल दीजिए। कविराज, आप महाराज की काव्यशास्त्र विनोद की महफिल के एक रसिक मित्र हैं। कालिदास का कोई नाटक हो, गीत-गोविन्द की कोई पंक्ति हो या सूफी पन्थ की कोई चर्चा हो, हमारे स्वामी कितने ज्ञानपिपासु हैं? यह हम अच्छी तरह जानते हैं। आपके साहचर्य में ही उन्होंने संस्कृत में प्रवीणता प्राप्त की। 'बुधभूषणम्' जैसा काव्य ग्रन्थ लिखा। 'नख शिख' और 'नायिकाभेद' जैसे महाकाव्य ब्रजभाषा में लिखे। यह सब कुछ आपकी संगति से ही सम्भव हुआ। आज युद्ध भूमि में आक्रमण करने के लिए उनके साथ हंबीरराव, म्हालोजी घौड़पड़े, रूपाजी भोसले जैसे अनेक लोग हैं। परन्तु ज्ञान और सरस्वती के प्रांगण में मुक्त विहार करते समय उन्हें केवल आपकी आवश्यकता होती है।" येसूबाई के कथन से कविराज निरुत्तर हो गये। वे व्यथित स्वर में बोले, "महारानी जी, यहाँ मुझे बहुत कष्ट है। यहाँ के लोग मुझ पर जादू-टोना करने का आरोप लगाते हैं। किन्तु रोज सवेरे हमारे महल के आसपास सुई चुभोये नींबुओं और काली गुड़ियों का ढेर पड़ा रहता है। यहाँ के भूतों का मुझे बहुत डर लगा रहता है।" येसूबाई के सामने हाथ जोड़कर कवि कलश ने दीन स्वर में पूछा, "महारानी जी, अब आप ही न्याय करें। विरोधियों के कथनानुसार क्या मैं जारण मारण क्रिया करने वाला कोई भोंदू मान्त्रिक हूँ? क्या आपको ऐसा लगता है?" येसूबाई ने मन्द मुस्कान के साथ कहा, "जैसा वे समझते हैं वैसा कोई राजा 302 सम्भाजी