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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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को बिगाड़ने वाला भयंकर मान्त्रिक हमारे दरबार में होता तो क्या हम चुप बैठे रहते ? देवी शिकोई की सौगन्ध, देवी के चरणों में जैसे नारियल फोड़ा जाता है, वैसे हम स्वयं उसके सिर को चूर-चूर कर देते।" कवि कलश सन्तुष्ट हो गये। उन्होंने येसूबाई की ओर देखा। येसूबाई की आँखों में उन्हें एक विलक्षण चमक दिखाई पड़ी। येसूबाई ने कहा— "दस्तूरखुद्द शिवाजी महाराज ने कविराज आपको बारह-पन्द्रह वर्षों तक बहुत करीब से देखा। जैसा कि यह दुष्ट मंडली कहती है, उसके अनुसार उनका युवराज किसी भोंदू मान्त्रिक या कब्जी बाबा के प्रभाव में चला गया होता तो ? .. तो कविराज महाराज ने ऐसे मान्त्रिक को कब का हाथी के पैर के नीचे कुचलवाकर मार न दिया होता ?" येसूबाई का धारदार वक्तव्य सुनकर कवि कलश की आँखें भर आयीं। वे भाव विह्वल होकर बोले, "महारानी जी, आपको सब कुछ पता है। यह हमारा सौभाग्य है।" "कविराज, मैं उसी अधिकार से आपको आदेश देती हूँ। यदि घोड़ों पर सामान लाद दिया हो तो उन्हें उतारकर रख दीजिए और सीधे शम्भूराजा के शिविर में चले जाइए। वे आपकी प्रतीक्षा कर रहे होंगे। आज एक समय में घर और बाहर के राहु-केतु, राजा को हैरान कर रहे हैं। मुगलों का मांडलिक बन जाने के बाद जंजीरे के सिद्दी समझते हैं कि स्वर्ग अब केवल दो अंगुल दूर रह गया है। गोवा के पुर्तगाली हैं, डच हैं, अँग्रेज हैं। हमारा जन्म-जन्मान्तर का शत्रु औरंगजेब अपनी बड़ी तैयारी के साथ कभी भी महाराष्ट्र पर आक्रमण कर सकता है। संकट की काली घटाओं से आसमान भर गया है। यहाँ राज्य का कार्यकलाप भी अभी तक व्यवस्थित नहीं हुआ है। ऐसे विकट समय में कविराज, महाराज को आवश्यकता है तो आप जैसे उत्साही, दिलेर, अनुभवी एवं विश्वसनीय मित्र की।" तीन सितम्बर 1681। इसी दिन आलमगीर औरंगजेब अजमेर से निकले थे। उनकी पाँच लाख से अधिक लड़ाकू फौज के साथ आचारे, भिस्ती मोतदार, खिदमतगार जैसे एक लाख सेवक थे। यह फौज दक्षिण की ओर चल रही थी। यह फौज नहीं एक सम्भा-३ ३०३

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